
Pooja Batra
पत्रकारिता में 20 साल से अधिक का अनुभव. 2001 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से M.A किया. फिर भारतीय विद्या भवन के फिल्म एंड टीवी ... और पढ़ें
बॉलीवुड में कई कलाकार अपनी खास पहचान बनाते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो अपने टैलेंट, मेहनत और अलग अंदाज से दर्शकों के दिलों पर एक खास छाप छोड़ देते हैं. फराह खान उन्हीं में से एक हैं. वह सिर्फ एक कोरियोग्राफर या फिल्म डायरेक्टर नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत हैं जो जहां जाती हैं, माहौल में हंसी, मस्ती और पॉजिटिव एनर्जी भर देती हैं.
फीमेल माइकल जैक्सन
उनके जीवन में कई दिलचस्प बातें हैं, लेकिन सबसे मजेदार यह है कि कॉलेज के दिनों में लोग उन्हें माइकल जैक्सन जैसी डांसर कहते थे. यह बात शुरुआत में सिर्फ एक मजाक की तरह लगती थी, लेकिन बाद में इसी हुनर ने उन्हें बॉलीवुड तक पहुंचा दिया.
बचपन में देखी गरीबी
फराह खान का जन्म 9 जनवरी 1965 को मुंबई में हुआ था. उन्होंने अपने जीवन में आर्थिक तंगी का सामना किया. इस दौरान उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ा. इन हालातों ने फराह को बचपन से ही मजबूत बना दिया. उन्हें जल्दी समझ आ गया कि अगर जीवन में आगे बढ़ना है तो मेहनत ही रास्ता है. शायद यही वजह है कि बाद में उन्होंने हर चुनौती को हिम्मत से अपनाया.
कैसे मिला माइकल जैक्सन का खिताब
फराह की जिंदगी डांस से बहुत जल्द जुड़ गई थी. लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कभी किसी डांस क्लास को ज्वॉइन नहीं किया. उनके असली गुरु माइकल जैक्सन थे, जिनके स्टेप्स वीडियो में देखकर वह प्रैक्टिस किया करती थीं और कॉलेज फंक्शन में परफॉर्म करती थीं. उनकी परफॉर्मेंस को देख लोग उन्हें ‘माइकल जैक्सन की फीमेल डांसर’ कहकर बुलाते.
उनके स्टेप्स, बॉडी लैंग्वेज, अंदाज… सब कुछ इतना मिलता-जुलता था कि कई कॉलेजों में वह ‘माइकल जैक्सन फीमेल डांसर’ के नाम से मशहूर हो गई थी. यह उनकी जिंदगी का पहला मोड़ था, जब लोगों ने उनके भीतर एक असली डांसर को देखा.
फराह खान का पहला ब्रेक
फराह को पहली बार फिल्मों में कोरियोग्राफी का जब मौका मिला, तो उन्होंने एक-एक कर ऐसे गानों पर काम किया जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं. उन्होंने 80 से ज्यादा फिल्मों में 1,000 से भी ज्यादा गानों की कोरियोग्राफी की. उनके गानों में साफ दिखता है कि वह डांस को सिर्फ स्टेप्स नहीं मानतीं, बल्कि कहानी का हिस्सा मानती हैं. उनकी पूरी कोशिश होती है कि पूरा गाना फुल फ्रेम में दिखे, कट्स और एडिटिंग में खो न जाए, यह अंदाज उन्हें दूसरों से अलग बनाता है.
फिल्मी करियर
कोरियोग्राफी में सफलता पाने के बाद उन्होंने डायरेक्शन की दुनिया में किस्मत आजमाई. जैसे ही उन्होंने निर्देशक की कुर्सी संभाली, बॉलीवुड को एक नया स्टाइल मिला. उन्होंने बतौर डायरेक्टर ‘मैं हूं ना’ फिल्म बनाई, जो सुपरहिट साबित हुई. उसके बाद ‘ओम शांति ओम’, ‘तीस मार खां’ और ‘हैप्पी न्यू ईयर’ जैसी फिल्में आईं, जिन्होंने उन्हें दर्शकों के बीच और मशहूर बना दिया. उनकी पहचान एक ऐसी महिला डायरेक्टर के रूप में बनी जो कैमरे के पीछे भी उतनी ही ऊर्जा और मजाकिया अंदाज लेकर आती हैं, जितनी सामने दिखाई देती हैं.
फराह खान को उनके काम के लिए कई पुरस्कार भी मिले. उन्होंने कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स जीते और बॉलीवुड की सबसे सफल महिला कोरियोग्राफर्स और डायरेक्टर्स में शामिल हुईं.
(इनपुट एजेंसी)
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