Gulzar Birthday Special: हिंदी सिनेमा जगत और साहित्य की दुनिया का वो नायाब सितारा जिसने अपनी लेखनी से पूरी दुनिया को मदहोश कर दिया. एक ऐसा कलमकार जिसने अदबी इदारों से लेकर फ़िल्मी गलियारों तक अपना परचम लहराया है. सफ़ेद कुर्ते से ढका वो बदन अपनी गीतों से दुनिया को और भी खूबसूरत बनाने की कोशिश में हैं. आज कल्पनाओं के आज़ाद पंछी संपूर्ण सिंह कालरा उर्फ गुलज़ार का जन्मदिन हैं. हिन्दी सिनेमा में फिल्मकार-गीतकार-संवाद लेखक और साहित्यकार गुलज़ार का जन्म भारत के झेलम जिला पंजाब के दीना गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है. Also Read - एक्ट्रेस वहीदा रहमान को किशोर कुमार सम्मान से किया जाएगा सम्मानित

18 अगस्त 1934 को जन्मे गुलज़ार ने अपनी नज़्मों में ज़िंदगी और सच्चाई का बेहतरीन मिश्रण किया है. मोहब्बत और इंकलाब के रंगों से रंगी गुलज़ार की हर पंक्ति आपके दिलों के अंदर उतर जाएगी. जन्मदिन के इस खास मौके पर हम आपके लिए गुलज़ार की कुछ चुनिंदा नज़्मों का नजराना लेकर आए हैं. Also Read - ये काम करके इतने खुश हैं गुलजार, जैसे मुद्दतों बाद एक सपना हुआ पूरा हुआ हो

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आदतें भी अजीब होती है…

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आदमी बुलबुला है पानी का…

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Gulzar famous poetry- तू उस वक्त कहां थी…?

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जाग जाएगा कोई ख्वाब तो मर जाएगा…

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इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी!

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मैं उड़ते हुए पंछियों को डराता हुआ…

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गुलज़ार साहब को अब तक कई सम्मानों से नवाज़ा जा चूका है. उन्हें 2004 में भारत के सर्वोच्च सम्मान पद्म भूषण से भी नवाजा जा चूका है वहीं 2013 में उन्‍हें हिंदी सिनेमा का सर्वोच्‍च सम्‍मान ‘दादा साहेब फाल्‍के’ सम्‍मान से सम्मानित किया जा चुका है.