जब देवदास के चक्कर में शादियां हो गई थी पोस्टपोन, भंसाली ने 42 जनरेटर के संग सजाया था सेट

बॉलीवुड डायरेक्टर संजय लीला भंसाली अपनी फिल्मों की शूटिंग के दौरान कोई कसर नहीं छोड़ते हैं और उन्होंने देवदास के दौरान भी कुछ ऐसा ही किया था.

Published date india.com Updated: March 9, 2025 8:31 AM IST
जब देवदास के चक्कर में शादियां हो गई थी पोस्टपोन, भंसाली ने 42 जनरेटर के संग सजाया था सेट

Sanjay Lella Bhansali Devdas: फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली अपनी शानदार फिल्मों के लिए जाने जाते हैं फिर चाहे वो पद्मावत हो या फिर देवदास, संजय जिस भी फिल्म को बनाते हैं वो बेहद लग्जरी सेट का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में आज हम आपको लिए उनके देवादस वाले सेट से एक किस्सा लेकर आए हैं, जो हाल ही में फिल्म से जुड़े सिनेमेटोग्राफर बिनोद प्रधान ने दिया है और उन्होंने बताया है कि कैसे बिना किसी चीज की परवाह किए फिल्म को इतना ग्रैंड बनाया.

एक ही सीन को कई बार सूट किया जाता था

सिनेमेटोग्राफर बिनोद प्रधान ने हाल ही में फ्राइडे टॉकीज के साथ बातचीत में बिनोद ने संजय लीला भंसाली के साथ देवदास में अपने पहले और एकमात्र साथ काम करने के अनुभव को साझा किया है. बिनोद ने कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो मुझे नहीं पता था कि सेट इतने बड़े होंगे, उन्हें लगा कि फिल्म का आकार उन्हें शॉट्स और लाइटिंग के साथ मौज-मस्ती करने का मौका देता है. वास्तव में, हमें शूटिंग की कोई जल्दी भी नहीं थी. यानी, दूसरी फिल्मों में हम एक दिन में 15-20 शॉट शूट करते थे, कभी-कभी तो 40 भी, लेकिन देवदास में हम सिर्फ़ 3-4 शॉट ही शूट कर रहे थे’.

दो साल तक शूट हो रहा था देवदास

इस फिल्म को लगभग दो साल की अवधि में शूट किया गया था और इसे उस समय की सबसे महंगी भारतीय फिल्म होने का टैग मिला था. बिनोद ने बताया कि फिल्म में देरी इस वजह से और हुई क्योंकि लाइट की व्यवस्था सही से नहीं था. उदाहरण के लिए, पारो का घर कांच से भरा हुआ था, ऐसे में सेट पर रोशनी होनी बेहद जरूरी थी. इसके अलावा, मैं बहुत तेज़ी से काम नहीं करता, और मुझे एक दृश्य को अच्छी तरह से लाइट करने के लिए समय चाहिए. हमें सही लाइट व्यवस्था प्राप्त करने के लिए तकनीक विकसित करनी थी और चंद्रमुखी के स्थान पर भी यही था. यह एक किलोमीटर लंबा सेट था और जब मैंने पहली बार इसे अपनी टीम के साथ देखा, तो मैं चौंक गया. हमने इस सेट का पूरा चक्कर लगाया और सोचा कि हम यहाँ के दृश्यों को कैसे फिल्माएंगे.

मुंबई के सारे जेनरेटर सेट पर थे

फिल्म निर्माण के प्रति संजय के बेबाक रवैये की प्रशंसा करते हुए बिनोद ने कहा, ‘एक समय ऐसा था जब कहा मुंबई में शादियां रुक गई थी, या फिर उन्हं पोस्टपोन करना पड़ा था क्योंकि हमने शहर के सभी जनरेटर इस्तेमाल कर लिए थे. यह एक बहुत बड़ा इलाका था और मुझे उस जगह को रोशन करने के लिए बहुत सारे जनरेटर इस्तेमाल करने पड़े. अगर कोई निर्देशक आपका समर्थन करता है, तो आप अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकते हैं’.

फिल्म का बजट उपर गया झेली आर्थिक दिक्कतें

बिनोद ने कहा, “संजय ने एक बार मुझसे समझौता न करने और सिर्फ़ अच्छा काम करने के लिए कहा था. दरअसल, एक समय ऐसा भी था जब देवदास को वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ा था और तब भी संजय ने मुझसे किसी भी चीज़ पर समझौता न करने के लिए कहा था. मैं हैरान रह गया क्योंकि मुझे लगा कि वह मुझसे शूटिंग जल्दी खत्म करने के लिए कहेगा या शॉट्स को ठीक करने में ज़्यादा समय न लगाने आदि के लिए कहेगा, लेकिन उसने जो कहा उसके लिए मैं उसे पसंद करता हूं और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमने देवदास के बाद किसी और फ़िल्म पर काम नहीं किया”.

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