ill fated Bollywood film killed the actors and the director guru dutt sanjeev kumar k asif took 23 years to make it
हालांकि बॉलीवुड इंडस्ट्री में ये कोई पहली फिल्म नहीं है जिसे बनाने में इतना वक्त लगा हो. लेकिन मनहूस का तमगा किसी को नहीं मिला होगा. हम बात कर रहे हैं फिल्म लव एंड गॉड की. जो 27 मई 1986 को बड़े पर्दे पर रिलीज़ हुई थी. क्या आप जानते हैं इसमें जितने भी हीरो को कास्ट किया गया उनकी मौत हो गई थी. इस वजह से इसे शापित फिल्म कहा गया. आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी.
फिल्म की कहानी
लव एंड गॉड लैला-मजनूं की मशहूर अरबी प्रेम कहानी पर आधारित थी. इसे निर्देशक के. आसिफ ने बनाया, जो मुगल-ए-आजम (1960) जैसी ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर के लिए मशहूर थे. इस फिल्म में निम्मी ने लैला और संजीव कुमार ने कैस (मजनूं) की भूमिका निभाई.
फिल्म की शुरूआत
फिल्म की शूटिंग 1963 में शुरू हुई थी. शुरुआत में गुरु दत्त को कैस के किरदार के लिए चुना गया था, और निम्मी उनकी को-स्टार थीं. के. आसिफ का सपना था कि यह फिल्म मुगल-ए-आजम से भी भव्य हो.
क्यों मानी गई “मनहूस” फिल्म?
फिल्म के निर्माण के दौरान कई दुखद घटनाएं हुईं, जिसके कारण इसे “शापित” कहा गया.
गुरु दत्त की मृत्यु (1964)
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1964 में, शूटिंग शुरू होने के एक साल बाद, गुरु दत्त की अचानक मृत्यु हो गई. उनकी मृत्यु को आत्महत्या माना गया. कहा गया कि उन्होंने नींद की शराब और नींद की गोलियां खाकर अपनी जान ली थी. उनकी उम्र मात्र 39 साल थी. इस घटना ने फिल्म को अधूरा छोड़ दिया, और शूटिंग रोक दी गई.
के. आसिफ की मृत्यु (1971)
1970 में के. आसिफ ने फिल्म को दोबारा शुरू किया और गुरु दत्त की जगह संजीव कुमार को कैस के किरदार के लिए चुना. लेकिन 1971 में, के. आसिफ की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई. उस वक्त उनकी उम्र 48-49 साल थी और 70% फिल्म शूट हो चुकी थी बस क्लाइमेक्स बाकी था. लेकिन इस नुकसान से ये फिल्म फिर अधर में लटक गई.
संजीव कुमार की मृत्यु (1985)
1985 में, फिल्म के रिलीज से पहले, मुख्य अभिनेता संजीव कुमार की भी हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई, उस वक्त वे केवल 47 साल के थे. इस तरह, फिल्म से जुड़े तीन प्रमुख लोग-गुरु दत्त, के. आसिफ, और संजीव कुमार-50 साल की उम्र से पहले दुनिया छोड़ गए.
फिल्म के अन्य कलाकार
फिल्म में प्राण, ललिता पवार, अमजद खान, और सिमी गरेवाल जैसे कलाकार भी थे, जिनमें से कई ने बाद में डबिंग पूरी की. कुछ कलाकार, जैसे मोहम्मद रफी, मुकेश, और खान मस्ताना, जिनके गाने फिल्म में थे, उनकी भी मृत्यु रिलीज से पहले हो चुकी थी.
फ्लॉप हुई ये फिल्म
अधूरी और पुरानी फुटेज के कारण फिल्म में के. आसिफ की भव्यता नहीं दिखी. नौशाद का संगीत, जिसमें मोहम्मद रफी और मुकेश के गाने थे, भी 1980 के दशक के हिसाब से पुराना लग रहा था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही और न तो आलोचकों ने सराहा, न ही दर्शकों ने.
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