Javed Akhtar Birthday: हिंदी सिनेमा जगत और उर्दू अदब की दुनिया का वो जगमगाता सितारा जिसने अपनी कलम से हर किसी का दिल जीता है. मोहब्बत हो या सियासत, हर विषय पर अपनी बेबाक लेखनी से इस शख्सियत ने अपनी एक खास पहचान बनाई. बॉलीवुड के गीतों से लेकर मुशायरों के मंच तक इस फनकार का बोलबाला रहा है. हिंदी सिनेमा के इस बेहतरीन शायर और गीतकार को लोग जावेद अख्तर (Javed Akhtar) के नाम से जानते हैं. आज इसी अज़ीम कलाकार का (Happy Birthday Javed Akhtar) जन्मदिन है. 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में जन्में जावेद अख्तर आज 76 साल के हो गए हैं. सलीम खान के साथ इन्होंने शोले, ज़ंजीर और न जाने कितनी कालजयी फ़िल्मों की पटकथा भी लिखी है.Also Read - हाथ में भगवद्गीता, टी-शर्ट पर 'जावेद अख्तर की पोती नहीं' लिखवाकर घूमने निकलीं Urfi Javed, लोग बोलें- नया नाटक

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सामाजिक मुद्दों पर हमेशा खुलकर अपनी राय देने वाले जावेद साहब ने अब तक ऐसे कई बयान (Javed Akhtar Controversial Statements) दिए हैं जिससे सनसनी मची है. आज उन्हीं बयानों में से एक बयान की तरफ हम फिर से रौशनी डालेंगे जिससे हर तरफ तहलका मच गया था. दरअसल जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने लाउडस्पीकर (Azaan on Loudspeaker) पर होने वाली अज़ान को लेकर बड़ा बयान दिया था. जावेद अख्तर ने लाउडस्पीकर पर अजान को गलत बताया था. उन्होंने कहा था कि इससे दूसरे लोगों को परेशानी होती है. इसलिए लाउडस्पीकर पर अज़ान करना बंद कर देना चाहिए. Also Read - Kangana Ranaut की याचिका कोर्ट ने की खारिज, Javed Akhtar से जुड़ा है मामला

जावेद अख्तर ने ये बात ट्वीट कर कही थी. उन्होंने लिखा था- ‘पहले लाउडस्पीकर पर हराम होता था, लेकिन अब ये हलाल हो गया है. और इसका कोई अंत नहीं है. अज़ान (Azaan) करना बुरा नहीं. अज़ान की आवाज़ अच्छी है, लेकिन लाउडस्पीकर पर करना ठीक नहीं. इससे दूसरों को परेशानी हो सकती है. इसलिए दूसरों की परेशानी समझ कर इसे बंद कर देना चाहिए.’

जावेद साहब के इस बयान से मुस्लिम समुदायों के लोगों को ठेस पहुंची थी. जावेद साहब के इस ट्वीट ने सोशल मीडिया पर आग लगा दी थी. कई लोग जावेद साहब की इस बात का समर्थन कर रहे थे वहीं, कई लोग उनकी आलोचना भी कर रहे थे. यही नहीं इसके अलावा जावेद साहब ने बुरका-घूँघट सिस्टम पर भी बयान दिए हैं.

बता दें कि जावेद अख्तर ने अपने करियर की शुरुआत सरहदी लूटेरा से की थी. 70 के दशक में स्क्रिप्ट राइटर्स का नाम फिल्मों के पोस्टर पर नहीं दिया जाता था, लेकिन सलीम-जावेद ने बॉलीवुड में उन बुलंदियों को छू लिया था कि उन्हें कोई न नहीं कह सका और फिर तो पोस्टरों पर राइटर्स का भी नाम लिखा जाने लगा. साल 1999 में जावेद साहब को पदमश्री और साल 2007 में पद्म भूषण जैसे सम्मान से नवाजा जा चुका है.