जोधपुर: जोधपुर की एक अदालत ने सोमवार को अभिनेता सलमान खान को अदालत में एक झूठा हलफनामा जमा करने से जुड़े मामले में बरी कर दिया. राजस्थान सरकार ने वर्ष 2006 में सलमान खान पर एक फर्जी हलफनामा जमा करने का आरोप लगाते हुए एक याचिका दायर की थी. ग्रामीण अदालत के सीजेएम अंकित रमन ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया. साल 1998 में सलमान खान को फिल्म ‘हम साथ साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान काले हिरन के शिकार में तीन अलग-अलग मामलों में मामला दर्ज किया गया था. इनमें से एक मामले में उन्हें शस्त्र अधिनियम मामला दर्ज किया गया था. इस मामले की सुनवाई के दौरान उनसे अपने शस्त्र का लाइसेंस जमा करने को कहा गया था. Also Read - बॉलीवुड एक्‍टर संजय दत्‍त की अचानक तबीयत बिगड़ी, मुंबई के लीलावती अस्‍पताल में भर्ती

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अभिनेता के अदालत में एक हलफनामा दायर किया था, जिसमें दावा किया गया था कि वह अपना हथियार लाइसेंस खो चुका है, जब वास्तव में वह इसके नवीनीकरण के लिए गए थे. इसके बाद राज्य सरकार ने आरोप लगाया था. अभियोजन पक्ष ने 2006 में खान के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 340 के तहत कार्रवाई करने के लिए कहा. हालांकि, बचाव पक्ष के वकील हस्तीमल सारस्वत ने दलील दी कि सलमान खान का अदालत को गुमराह करने का इरादा नहीं था. उनका लाइसेंस वास्तव में उस समय गायब था, जब उन्हें पेश करने को कहा गया. उनके खिलाफ कोई भी कार्यवाही अनुचित होगी. सारस्वत ने कहा, “सलमान खान के शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किए जाने के तुरंत बाद हमने उनसे अपने हथियार का लाइसेंस भेजने के लिए कहा था. उन्होंने अपने घर में लाइसेंस को खोजा, लेकिन नहीं मिला क्योंकि इसे मुंबई पुलिस आयुक्त के कार्यालय में नवीनीकरण के लिए जमा किया गया था.”

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सारस्वत ने कहा, “सलमान खान यह बात भूल गए थे. उन्होंने बांद्रा पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई. हमने अदालत में दूसरे दस्तावेजों के साथ लाइसेंस गुम होने की रिपोर्ट जमा की है. हालांकि, डीसीपी ने बाद में नवीनीकृत लाइसेंस भेजा, इसके बाद अभियोजन पक्ष ने सलमान खान पर फर्जी सर्टिफिकेट अदालत में जमा करने का आरोप लगाया.” उन्होंने कहा, “हमने दलील दी कि उनका ऐसा कोई गलत इरादा नहीं था. एक व्यक्ति कभी-कभी भूल जाता है कि उसने अपने दस्तावेज कहां रखे हैं. इस मामले में उन्हें तंग नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उनकी मंशा को ध्यान में रखा जाना चाहिए. सलमान द्वारा दिए गए सभी बयान मेल खाते हैं और इसमें कोई विरोधाभास नहीं है और इसलिए उन्हें मुक्त कर दिया गया.”