हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेता और लेखकर कादर खान का कनाडा में निधन हो गया है. वह 81 साल के थे. बेटे सरफराज ने कादर खान के निधन की पुष्टि की है. कादर खान ने अपने फिल्मी कैरियर में अभिनय, संवाद लेखन, स्क्रिप्ट लेखन, और निर्देशन भी किया है. क़ादर खान के काम का लोहा इसी बात से साबित होता है कि उनको 13 बार फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया जिसमें से उन्होंने 4 बार फिल्म फेयर पुरस्कार जीता.

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कादर की गिनती बॉलीवुड के फेमस विलेन में होती थी. लेकिन एक घटना ने निगेटिव किरदार के प्रति उनकी सोच को बदल दिया. दरअसल, एक दिन उनका बेटा स्कूल में लड़ाई करके घर लौटा. जब उन्होंने पूछा कि लड़ाई क्यों की तो बेटे ने बताया कि स्कूल में सब उसे चिढ़ाते हैं कि उसके पिता बुरे आदमी और विलेन हैं. बेटे की बात सुनकर वे चौंक गए और उसी वक्त तय कर लिया था कि अब वे फिल्मों में अच्छे रोल करेंगे.

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बता दें, कादर खान मुंबई के एम.एच सब्बू सिद्दिकी पॉलिटेक्निक और एम.एच सब्बू सिद्दिकी टेक्निकल हाईस्कूल में सिविल इंजीनियरिंग पढ़ाते थे. इस महान अभिनेता फिल्मी दुनिया में लाने का श्रेय ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार को जाता है. दरअसल, कादर खान को एक्टिंग के अलावा नाटक लेखन का भी शौक था. कॉलेज के एनुअल-डे फंक्शन में उनके नेतृत्व में एक नाटक किया जा रहा था. इसी फंक्शन में बतौर चीफ गेस्ट बनकर आए दिलीप साहब की नजरों ने कादर खान के अंदर की प्रतिभा को पहचाना था और उन्हें मायानगरी की दुनिया में ले आए.

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