लखनऊ/देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को रिलीज हो रही 2013 में केदारनाथ की प्रलयंकारी बाढ़ की त्रासदी की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म ‘केदारनाथ’ के प्रदर्शन पर कोई प्रतिबंध ना लगाते हुए इस संबंध में जिलाधिकारियों को हालात के अनुसार स्वयं निर्णय लेने को कहा है. फिल्म को लेकर उठ रही आपत्तियों के मद्देनजर सरकार ने पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में गठित समिति की रिपोर्ट पर विचार-विमर्श के बाद देर शाम यह फैसला लिया.

यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, ‘केदारनाथ’ फिल्म के संबंध में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में देर शाम मुख्यमंत्री आवास में हुई बैठक में समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश की. समिति में गृह सचिव नितेश झा, सूचना सचिव दिलीप जावलकर तथा पुलिस महानिदेशक अनिल रतूडी बतौर सदस्य शामिल थे. व्यापक विचार- विमर्श के बाद ‘केदारनाथ’ पर शासन स्तर पर कोई प्रतिबंध न लगाने का निर्णय लेते हुए उसे जिलास्तर पर चलाने या न चलाने के लिए जिलों के हालात को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारियों द्वारा स्वयं निर्णय लेने को कहा गया. प्रदेश में खासतौर से केदारनाथ क्षेत्र के स्थानीय लोग फिल्म का विरोध कर रहे हैं और उनका आरोप है कि इसमें दिखायी गयी एक हिंदू श्रद्धालु और एक मुस्लिम पोर्टर के बीच की प्रेम कहानी लव जिहाद को बढ़ावा देगी.

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आज रिलीज हो रही फिल्‍म
सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान की जोड़ी वाली यह फिल्म सिनेमाघरों में शुक्रवार को रिलीज हो रही है. सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा की यह पहली फिल्म है. इससे पहले दिन में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भी ‘केदारनाथ’ फिल्म पर प्रतिबंध लगाने को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी. याचिका में फिल्म को हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए उसके प्रदर्शन पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था. याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति रमेश खुल्बे की खंडपीठ ने कहा कि संजय लीला भंसाली की ‘पद्मावत’ की रिलीज के समय इसी तरह के विवाद ने फिल्म को सुपरहिट बना दिया था.

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अदालत ने दी ये सलाह
अदालत ने याचिकाकर्ता को फिल्म को लेकर अपनी आपत्तियों के साथ रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली एक उच्चधिकार प्राप्त समिति के पास जाने की भी सलाह दी. अदालत ने इस संबंध में उचित निर्णय लेने का अधिकार रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी पर छोड़ते हुए कहा कि वह क्षेत्र में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति के अनुसार अपने विवेक का इस्तेमाल कर सकते हैं. अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील को भी सलाह दी कि अगर उनकी इच्छा नहीं है तो इस फिल्म को न देखें .