लव गेम्स रिव्यु: भट्ट कैंप की टिपिकल फिल्म एक नयी कहानी के साथ

फिल्म को डायरेक्ट किया है विक्रम भट्ट ने और प्रोड्यूस किया है महेश भट्ट और मुकेश भट्ट ने

Published date india.com Published: April 8, 2016 1:23 PM IST
Love Games movie review | लव गेम्स रिव्यु: भट्ट कैंप की टिपिकल फिल्म एक नयी कहानी के साथ

भट्ट बैनर की सारी फिल्में ना जाने क्यों एक ही जैसी लगती हैं। फिल्म का ट्रेलर देखकर ही कोई भी बता सकता है की ये भट्ट कैंप की फिल्म है। सेक्स सीन्स से भरपूर, थोडा थ्रिलर, थोड़ा रोमांस और कुछ अच्छे गाने। यही पहचान है भट्ट कैंप की फिल्मों की। और ऐसी ही एक फिल्म है ‘लव गेम्स’ जिसमें एक्टर गौरव अरोरा ने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया है। फिल्म में एक्ट्रेस पत्रलेखा और तारा अलीशा बेरी मुख्या भूमिका है। फिल्म को डायरेक्ट किया है विक्रम भट्ट ने और प्रोड्यूस किया है महेश भट्ट और मुकेश भट्ट ने।(किसिंग, सेक्स सीन्स और अश्लील डायलॉग से भरपूर है लव गेम्स का नया प्रोमो)

फिल्म की कहानी शुरू होती है एक जानेमाने बिजनेस मैन की मौत से। उस बिजनेस मैन की पत्नी रमोना (पत्रलेखा) को इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ता की उनसके पति की मौत हो चुकी है। वो अपने सेक्स बडी समीर (गौरव अरोरा) के साथ पार्टी करती है। रमोना को सेक्स की लत है और वो गौरव को सिर्फ सेक्स के लिए ही चाहती है। दूसरी तरफ समीर भी एक जानमाने बिजनेस मैन का बेटा है। उसके पास सब कुछ है लेकिन फिर भी उसे कुछ कमी सी लगती है। वो बार-बार खुद का हाँथ काटता है जिस वजह से मनोचिकित्सक के पास उसका इलाज चल रहा है। एक दिन वो और रमोना एक किताब पढ़ते हैं ‘लव गेम्स’ और उसे असल ज़िन्दगी में आज़माने की सोचते हैं। दोनों पार्टीज में जाते हैं, सबसे खुश कपल को अपना टारगेट बनाते हैं। जो उस कपल में से किसी के साथ सबसे पहले सेक्स करेगा वो गेम को जीत जायेगा। इसी गेम को खेलते हुए एक पार्टी में समीर, अलीशा (तारा अलीशा बेरी) से मिलता है और उसे प्यार करने लगता है। अलीशा एक डॉक्टर है लेकिन उसकी शादी से वो बहुत दुखी है क्योंकि उसका पति गौरव (हितेन तेजवानी) उस पर बिना वजह शक करता है और मारता पिटता है। दूसरी तरफ जब ये बात रमोना को पता चलती है की समीर किसी और से प्यार करने लगा है और अब उससे सेक्स नहीं करेगा तो वो उसे परेशान करने लगती है और वो उसका रिश्ता तुड़वा देती है जिसके बाद एक नया लव गेम शुरू हो जाता है। (लव गेम्स के गाने में फिर परोसी गई खूब अश्लीलता)

फिल्म एक टिपिकल भट्ट कैंप फिल्म है। कहानी ठीक ठाक है लेकिन इसे और बेहतर बनाया जा सकता था। फिल्म का पहला हाफ थोडा स्लो है लेकिन सेकंड हाल्फ काफी दिलचस्प। फिल्म का क्लाइमेक्स बहुत बढियां है लेकिन थोड़ा एक्सपेक्टेड था। कोई भी अंदाज़ा लगा सकता था की फिल्म के अंत में क्या होगा लेकिन कैसा होगा ये एक सरप्राइज था।

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पत्रलेखा ने काफी बढियां एक्टिंग की है। उनकी पहली फिल्म सिटी लाइट्स में जहाँ वो एक सीधी साधी गाँव की लड़की के किरदार में नज़र आई थी वहीँ इस फिल्म में उन्होंने हटके किरदार निभाया है। नेगेटिव रोल में वो काफी जची हैं। गौरव अरोरा जिनकी ये पहली फिल्म है उनकी एक्टिंग में कुछ ख़ास दम नहीं था। उनमें ऐसी कोई ख़ास बात नहीं नज़र आई हमें जो लोग उन्हें या उनके करैक्टर को याद रखेंगे। तारा अलीशा ने भी अच्छी एक्टिंग की है। वो इस फिल्म में काफी खूबसूरत लग रहीं हैं। कही भी ऐसा नहीं लगता की वो कुछ न्यूकमर्स की तरह ओवर-एक्टिंग कर रहीं हैं। (‘लव गेम्स’ के प्रोमो में अश्लीलता की हदें हुईं पार)

फिल्म का म्यूजिक कुछ ख़ास नहीं है। भट्ट कैंप की फिल्मों के गाने हमेशा से पसंद किये गए हैं लेकिन ये इस फिल्म के गाने कुछ ख़ास नहीं हैं।

कुछ मिलाकर ये एक ठीक ठाक फिल्म है। एक बार देखने में कोई हर्ज़ नहीं है। इस वीकेंड अगर आपके पास फ्री टाइम है तो बेशक इस फिल्म को आप देख सकते हैं।

रेटिंग: * * 1/2

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