पणजी: फिल्मों में अक्सर अदाकरों की बात करते करते हम लेखकों की बात करना भूल जाते हैं. हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कुछ ऐसे लेखक हैं जिन्होंने अपनी लेखनी से एक नया मयार कायम किया है. आज के दौर में जब सब कुछ रीमिक्स बना कर परोस दिया जाता है तब कुछ ऑरिजिनल आइडियाज ही फिल्मों को एक नया रूप देने में मदद करते हैं.’तलवार’ और ‘राजी’ जैसी हिट फिल्में देने वाली निर्देशक मेघना गुलजार अक्सर अपनी फिल्मों के लिए खूब सराही जाती है.Also Read - भोजपुरी में जलवे दिखाने के बाद रानी चटर्जी की बॉलीवुड में एंट्री, किस एक्टर के साथ रोमांस करती नज़र आएंगी?

Also Read - पर्दे पर होगी 'Sam Bahadur' की एंट्री, Vicky Kaushal करेंगे फील्ड मार्शल Manekshaw की बायोपिक- First Look

सोशल मीडिया पर एक बार फिर ट्रोल हुई निया शर्मा, लोगों ने कहा- ‘धरती पर सबसे ज्यादा ओवररेटेड और बदसूरत सेलेब्रिटी’ Also Read - ऐसी 5 बॉलीवुड फिल्में जो पाकिस्तान में नहीं हो पाई रिलीज, इन वजहों से हुई बैन 

उनका मानना है कि लेखन एक ऐसी प्रक्रिया है जहां ढेरों आइडियाज मिलाकर कुछ नए और क्रिएटिव चीजें निकल सकती हैं. उन्होंने रविवार को कहा कि उन्हें लेखन में सहयोग पसंद हैं, क्योंकि वे एक आलसी लेखिका हैं. इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (आईएफएफआई) के 50वें संस्करण में इंट्रैक्टिव सेशन के दौरान मेघना ने कहा, “मुझे लेखन में सहयोग पसंद है क्योंकि मैं काफी आलसी लेखिका हूं. सह-लेखकों के साथ मौखिक विवाद करने में मजा आता है. विवाद से भी अधिक, सहयोग लेखन से अलग दृष्टिकोण सामने आते हैं, जिससे स्क्रीप्ट की रचनात्मकता में बदलाव आता है और उसका स्तर बढ़ता है.” इसके साथ ही गुलजार ने यह भी बचाया कि एक फिल्मकार के तौर पर वह भी किसी के साथ फिल्म बनाने के दौरान लगाव और अलगाव के चक्र से गुजरती हैं.