#MeToo का असर बॉलीवुड के अलावा देश के बाकी हिस्सों में भी देखने को मिला है. जी जयपुर लिटरेचर महोत्सव (Zee Jaipur Literature Festival) के आयोजकों ट्वीट कर भारत में ‘मी टू’ अभियान का समर्थन किया है. इसी को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं क्या इसका असर इस फेस्टिवल में पर भी देखने मिल सकता है. Also Read - यौन उत्पीड़न के आरोप में घिरा ये अमेरिकी रैपर, सोशल मीडिया पर दिखा लोगों का गुस्सा

#MeToo के तहत सी.पी. सुरेंद्रन, सुहेल सेठ और चेतन भगत आरोप लगने के बाद इन्हें बुलाने पर संशय बना हुआ है. जेएलएफ के आधिकारिक हैंडल से किए गए एक ट्वीट में कहा गया, “जी जयपुर लिटरेचर महोत्सव सुस्पष्ट ढंग से उन महिलाओं के साथ खड़ा है, जिन्होंने समानता और गरिमा के लिए साहसपूर्वक आवाज उठाई है और संस्थान उनकी आवाजों का समर्थन एवं उन्हें बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.” Also Read - #MeToo: रेप के आरोपी आलोकनाथ की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, अब आया ये फैसला

जेएलएफ ने हालांकि इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं कहा कि आरोपित वक्ताओं को उत्सव में बुलाया जाएगा या प्रतिबंधित किया जाएगा. www.change.org लेखिका-संपादक रजनी जॉर्ज द्वारा एक अभियान शुरू करने के बाद यह बयान आया है. रजनी ने महोत्सव के आयोजकों से मी टू इंडिया का समर्थन करने और यौन उत्पीड़न के खिलाफ खड़े होने को कहा था. Also Read - #MeToo मूवमेंट पर खुलकर बोलीं तनुश्री दत्ता, 'मीडिया फालतू में मुझे हीरो बना रहा'

रजनी ने कहा था, “हमने आज भारत में मी टू अभियान के हिस्से के रूप में साहित्य जगत में कई पुरुषों के खिलाफ हाल ही में लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की गंभीरता और विश्वनीयता के संदर्भ में आयोजकों को लिखा है.” उन्होंने कहा, “हम इन लोगों पर लगे आरोपों से गुस्सा, दुखी और निराश हैं. हम जयपुर लिटरेचर महोत्सव (जेएलएफ) के कार्यों की प्रशंसा करते हैं.

भारत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित साहित्य महोत्सव होने के नाते हमारा मानना है कि जेएलएफ इस मुद्दे को हल करने में आगे आना बखूबी जानता है.” बता दें इस बार यह महोत्सव 24-28 जनवरी 2019 को आयोजित होगा.