#MeToo के तहत बॉलीवुड जगत और आम महिलाएं अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न को अब समाज के सामने ला रही हैं. फिल्मकार मधुर भंडारकर की फिल्म ‘फैशन’ ने फैशन जगत के काले सच से रूबरू कराया था. फिल्म में काम के लिए यौन संबंध बनाने के पहलू को दिखाया गया था. भारत के पुरुष मॉडल्स का कहना है कि फैशन जगत में यह प्रचलित है. उभर रहे मॉडल्स को तत्काल सफलता की ललक होती है और कई मामलों में काम पाने के लिए वे समझौता कर लेते हैं. Also Read - #MeToo: आरोपी को करोड़ों डॉलर देने पर Google कर्मचारियों ने किया काम का बहिष्कार

मॉडल कंवलजीत सिंह आनंद के डिजायनर विजय अरोरा पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद मीटू अभियान के तहत पुरुष मॉडलों के भी यौन उत्पीड़न का शिकार होने लेकर बहस चल पड़ी है. दक्षिण सिनेमा में अब लोकप्रिय अभिनेता कबीर दुहन सिंह का कहना है कि बिना अनुमति कोई किसी को नहीं छू सकता. कबीर जल्द ही बॉलीवुड में डेब्यू करने वाले हैं. Also Read - #MeToo: समर्थन में उतरे रॉनी स्क्रूवाला..कहा, 'इसने डर तो पैदा किया है'

उन्होंने कहा कि शुरूआत में उन्हें लगभग एक साल तक काम नहीं मिला था क्योंकि वे डिजायनर्स से उनकी जगहों पर मिलने-जुलने के लिए खुले नहीं थे. कबीर ने मीडिया से कहा, “मुझे लगता है कि यह हम पर निर्भर करता है कि दूसरों के सामने हम खुद को कैसे प्रदर्शित करते हैं. मैं मॉडल्स को डिजायनर्स के साथ शराब पीते और उनके साथ अंतरंग डांस करते देखता था. तो अगर आप उन्हें इतनी आजादी देते हैं तो वे इसका फायदा उठाएंगे और यही बॉलीवुड में होता है.” Also Read - #MeToo: सैफ अली खान का बयान, 'मेरी फैमिली की तरफ आंख उठाने वाले की खैर नहीं'

उनका मानना है कि लोगों को एक सीमा बनानी चाहिए. उन्होंने कहा, “मॉडलिंग इंडस्ट्री में नई पीढ़ी बहुत खुली हुई है और वे बहुत कम समय में सफलता पाना चाहते हैं.” फरीदाबाद में जन्मे और पले-बढ़े कबीर 2011 में मुंबई चले गए थे और मॉडलिंग करने लगे थे. उन्होंने तेलुगू फिल्म ‘जिल’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की जिसके कारण उन्हें कई सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं.

मॉडलिंग जगत के एक अन्य स्थापित नाम अमित रंजन अब ए.आर. नाम का एक प्रोडक्शन हाउस चलाते हैं जो फैशन कार्यक्रम आयोजित करती है. उनका कहना है कि उन्होंने जब 2007 में फैशन दुनिया में प्रवेश किया था, वे उससे पहले से फैशन उद्योग के कार्यकलाप के बारे में जानते थे. अमित ने कहा, “मुझे लगता है कि फैशन जगत में पुरुष मॉडलों का शोषण बहुत होता है क्योंकि उन्हें महिला मॉडलों की अपेक्षा कम रुपए मिलते हैं.

इसके अलावा उन्होंने कहा, ”वे अपने डिजायनरों द्वारा तैयार किए जाते हैं. वे उस सिद्धांत पर काम करते हैं, ‘मैं आपका खयाल रखूंगा, आप मेरा खयाल रखें.’ इसलिए कोई किसी का नाम नहीं लेता क्योंकि यह आपसी सहमति से होता है.” उन्होंने कहा कि ऐसे मॉडल्स को लोकप्रियता के लिए मीटू अभियान का सहारा नहीं लेना चाहिए.

(इनपुट आईएएनएस)