बॉलीवुड एक्ट्रेस नंदिता दास के पिता जतिन दास पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद निशा बोरा एक और बयान दिया है. निशा का कहना है कि अधिक आवाजों के खुलकर सामने आने से वह खुश हैं और अब उनका काम आराम से बैठकर गौर करना और उनका भरोसा करना है. उन्होंने कहा, “अगर आप ट्विटर पर देखें तो कई महिलाएं बोल रही हैं. कुछ गुप्त रूप से बोल रही हैं..कुछ फेसबुक पर बोल रही हैं. इस वक्त, मैं अपनी पीड़ा बताकर खुश हूं.” Also Read - यौन उत्पीड़न के आरोप में घिरा ये अमेरिकी रैपर, सोशल मीडिया पर दिखा लोगों का गुस्सा

42 वर्षीय निशा बोरा ने कहा, “जब मैंने शुरूआत की थी, तो मैंने नहीं सोचा था कि इतनी महिलाएं बोल उठेंगी. अब मेरा काम आराम से बैठकर उन्हें सुनना है, उन पर ध्यान देना और भरोसा करना है.” उन्होंने कहा कि वह दास से 2004 में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में मिली थीं. उस वक्त वह 28 साल की थीं और शादी हुए उन्हें एक साल भी नहीं बीता था. बोरा एलरहिनो पेपर की सह संस्थापक हैं. यह संगठन असम में स्थित है, जो गैड़ों और हाथी के गोबर से हैंडमेड पेपर बनाता है. Also Read - #MeToo: रेप के आरोपी आलोकनाथ की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, अब आया ये फैसला

बोरा ने एक ट्वीट में कहा था, “मैं खिड़की गांव में जतिन से उनके स्टूडियो में मिली थी..दूसरी बात जो मैं जानती हूं वह यह कि उन्होंने मुझे पकड़ने की कोशिश की. मैं घबराकर उनसे दूर हो गई. इसके बाद उन्होंने फिर ऐसा करने की कोशिश की. इस बार वह भद्दे तरीके से मेरे होठों को चूमने में कामयाब रहे. मैं आज भी उनकी दाढ़ी की चुभन महसूस करती हूं. मैं उन्हें धक्का देकर दूर हो गई. उस समय उन्होंने मुझसे कहा था कि आओ भी, अच्छा लगेगा या ऐसा ही कुछ.” Also Read - #MeToo मूवमेंट पर खुलकर बोलीं तनुश्री दत्ता, 'मीडिया फालतू में मुझे हीरो बना रहा'

बोरा ने कहा, “मेरा मानना था कि इस बारे में बात करने से दिक्कत पैदा होगी. मुझे लगता था कि उस मुसीबत के लिए मैं खुद जिम्मेदार हूं और मुझे ही उससे निपटना है. मैं खुद को दोषी और शर्मिंदा महसूस करती थी.” वहीं दास ने हालांकि इन आरोपों का खंडन किया और इसे हास्यास्पद और बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि वह बोरा को जानते ही नहीं.