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निर्माता : सुनील लुल्ला, राकेश झुनझुनवाला, आरके दमानी, आर बाल्की Also Read - कपिल शर्मा शो में सैफ अली खान ने सरेआम बता दी करीना से जुड़ी पर्सनल बात, तैमूर की मम्मी हुईं शर्म से लाल

निर्देशक : आर बाल्की

संगीत : इलैयाराजा

कलाकार : अर्जुन कपूर, करीना कपूर खान, स्वरूप सम्पत, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन

रिलीज डेट : 1 अप्रैल 2016

चीनी कम, पा, शमिताभ, इंग्लिश विंग्लिश जैसी हटके और बेहतरीन फ़िल्में बनानेवाले फिल्म निर्माता आर बालकृष्णन उर्फ़ आर बाल्की अपनी एक और अद्भुद फिल्म लेकर हाज़िर हुए हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं अर्जुन कपूर और करीना कपूर खान स्टारर ‘की एंड का’ फिल्म की। ‘की एंड का’ के लिए अद्भुद शब्द का प्रयोग मैंने जानबूझकर किया है।यह भी पढ़ें: इसलिए करीना कपूर ने सैफ़ अली खान से की थी शादी

आजके पुरुष प्रधान समाज में इस विषय पर सिर्फ़ आर बाल्की ही फिल्म बना सकते हैं। यह फिल्म स्त्री पुरुष समानता को तर्जी देती है और असल में स्त्री पुरुष समानता क्या है उसका अनोखे तरीके से सटीक विश्लेषण भी करती है।

हालाँकि क्रिटिक ने इस फिल्म को समिश्र प्रतिक्रियाएं दी हैं।फिल्म का पहला हिस्सा थोडा धीमा है लगता है की बस दुसरे हिस्से तक पहुचने के लिए इसे बनाया गया है। लेकिन दूसरा हिस्सा जिज्ञासा को बढाता है और फिल्म आखिर तक देखने के लिए मजबूर करती है। आइये जानते हैं क्या है ‘की एंड का’ की कहानी।

ऐसी है ‘की एंड का’ की कहानी

‘की एंड का’ शीर्षक लड़की और लड़का से लिया गया है। कहानी के शीर्षक में जो ‘की’ और ‘का’ शब्द का प्रयोग किया है वो लड़की और लड़का के स्वरुप में किया गया है। कबीर (अर्जुन कपूर ) एक अरबपति बिल्डर बंसल (राजित कपूर ) का बेटा है जो वेल एजुकेटेड है लेकिन नौकरी करने के बजाए अपनी माँ की तरह बनना चाहता है।

किया (करीना कपूर खान)  एक कैरियर ओरिएंटेड लड़की है जो जिंदगी में बेहद कामयाब होना चाहती है। एक फ्लाईट में दोनों की मुलाकात होती है और फिर मुलाकातों का सिलसिला दोस्ती में तब्दील हो जाता है। शुरू में तो किया कबीर को एक अरबपति बाप का बेटा होने की वजह से पसंद करती है पर कबीर किया को सच बता देता है की वो अपने पिता की तरह दौलतमंद नहीं बल्कि जैसी उसकी माँ एक बेहतर हाउस वाइफ थी वो भी एक हाउस हस्बैंड बनना चाहता है।

किया को पहले तो यह बात अजीब लगती है लेकिन फिर वो अपनी माँ स्वरुप संपत) के कहने पर कबीर से शादी कर लेती है। जिस तरह से एक मर्द औरत को मंगलसूत्र पहनाता है उसी तरह से किया कबीर को मंगलसूत्र पहनाती है। कबीर शादी के बाद परफेक्ट हाउस हस्बैंड बन कर अपनी पत्नी और सास का पूरा ख्याल रखता है। किया को भी कामयाबी मिलती है। किया कबीर के जिंदगी में सब कुछ ख़ुशहाल होता है, लेकिन एक टीवी इंटरव्यू के बाद कबीर किया से ज़्यादा फ़ेमस जाता है।

किया को कबीर की कामयाबी से जलन होती है। जैसा की असल जिंदगी में पति को अपनी पत्नी की कामयाबी से इर्ष्या होती है।  कहानी के इस मोड़ पर यह साफ़ हो जाता है की स्त्री पुरुष समानता में पैसों की भी बेहद बड़ी भूमिका है।

साथ ही  घर में कमानेवाले और उसपर निर्भर लोगों के बीच के (चाहे वो ‘का एंड की’ का रिश्ता हो या फिर ‘की एंड का’ का ) नाज़ुक रिश्ते का कड़वा सच भी उजागर करता है। यहीं दोनों किया और कबीर के रिश्ते में दरार भी आ जाती है इसके बाद क्या होता है यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

Ki-And-Ka

अदाकारी-

फिल्म में ज्यादा किरदारों के लिए खास जगह नहीं है। अर्जुन कपूर और करीना कपूर मुख्य भूमिका में हैं। दोनों ने बेहद अच्छी अदाकारी की है। खास कर अर्जुन कपूर के लिए यह भूमिका करना बेहद मुश्किल रहा होगा लेकिन उन्होंने इसे बखूबी अंजाम दिया है।

उनके मोटापे को लेकर सवाल ज़रुर उठ रहे हैं लेकिन बतौर हाउस हसबैंड मोटा होना कहानी की ज़रूरत नज़र आती है। स्वरुप संपत और राजित कपूर सहायक भूमिका में अच्छा योगदान दिया है। वहीं अमिताभ बच्चन और जया बच्चन भी कैमियो रोल में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब हुए हैं।

निर्देशन-

आर बाल्की के निर्देशन की जितनी तारीफ़ की जाए वो बेहद कम है। कमज़ोर स्क्रिप्ट होने के बावजूद बल्कि ने इसे उम्दा तरीके से पेश किया है। लिमिटेड किरदार, लिमिटेड लोकेशन को पेश करने में बाल्की ने बेहद ज्यादा मेहनत की होगी जो फिल्म में साफ़ नज़र  आती है।

म्यूजिक और गाने-

फिल्म को मिथुन और इलैयाराजा ने म्युज़िक दिया है। ‘हाई हिल’, जी हुजूरी, मोस्ट वांटेड मुंडा जैसे गीत बेहतरीन हैं। ‘हाई हिल’ और ‘मोस्ट वांटेड मुंडा’ तो पहले ही हिट हो चुके हैं। फिल्म में बैक ग्राउंड स्कोर को ख़ास महत्व नहीं है लेकिन वो भी ठीक ठाक ही है। यह भी पढ़ें: ऐसा है ‘की एंड का’ का ‘हाई हील्स’ गाना 

डायलॉग-

फिल्म की कहानी में जिस तरह से कई नुक्स नज़र आते हैं, उसी तरह से फिल्म के डायलॉग भी बेहद ज़्यादा कमज़ोर नज़र आते हैं। आर बाल्की की फिल्मों की तुलना की जाए तो सबसे कमज़ोर डायलॉग इसी कहानी के हिस्से में आए हैं ऐसा कहा जाए तो शायद गलत नहीं होगा।

फिल्म की अच्छी बातें-

1 ‘की एंड का’ बेहद नया कॉन्सेप्ट है, यही वजह है की इसकी कहानी भी घिसी पिटी नहीं है।

2 फिल्म का संदेश जानदार है। स्त्री पुरुष समानता के साथ घर के कमानेवाले और उसपर निर्भर लोगों की मानसिकता को भी उम्दा तरीके पेश किया गया है। हर परिवार में इस तरह के उतार चढ़ाव देखने को मिलते हैं। अगर वो इस फिल्म को देखले तो उन्हे अपनी ज़िम्मेदारी और गलती का एहेसास हो सकता है।

3 यह एक ड्रामा फिल्म है लेकिन इसे लव स्टोरी और फॅमिली ड्रामा के तौर पर भी देखा जा सकता है।

फिल्म की बुरी बातें-

1 फिल्म कॉन्सेप्ट और कहानी नए है लेकिन शायद समाज के हर किसी को यह कहानी पसंद आए इसकी संभावनाएं कम ही हैं।

2 फिल्म की स्क्रिप्ट राइटिंग बेहद कमज़ोर है।

3 फिल्म के डायलॉग भी खास प्रभावित नहीं करते हैं।

फिल्म देखें या ना देखें-

यह फिल्म स्त्री पुरुष समानता के अलावा पति पत्नी का रिश्ता मजबूत होने के लिए भी बेहद बड़ा संदेश देती है। इस फिल्म के ज़रिए पति पत्नी को अपनी ज़िम्मेदारी और गलती का एहेसास होता है, इसलिए पति पत्नी ने इस फिल्म को ज़रूर देखना चाहिए। इसके अलावा अगर आप आर बाल्की की फिल्मे  और अर्जुन कपूर और करीना कपूर की एक्टिंग देखना चाहते हैं तो यह फिल्म ज़रूर देखें।

मूवी रिव्यु: ***