निर्देशक: अभिषेक सक्सेना
कलाकार: शारिब हाशमी, ज्योति सेठी, नूतन सूर्या और इनामुलहक
अवधि: 1 घंटा 36 मिनट
सर्टिफिकेट: A
रेटिंग: 3 स्टारAlso Read - रिव्यू-अपने भीतर के ‘कसाई’ से रूबरू करवाती कहानी

अभी तक समझ नहीं पा रही हूं जहां एक तरफ सरकार मासिक धर्म को लेकर समाज में जागरुकता फैलाने की कोशिश कर रही हैं वहीं फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट क्यों दिया गया है. बल्कि इस तरह का अच्छा संदेश देने वाली फिल्मों का जोर-शोर से प्रचार होना चाहिए. ‘फुल्लू’ बेहद ही स्ट्रांग विषय पर बनी फिल्म है. उस विषय पर बनी फिल्म है जिसके बारे में आज हर किसी को खुल कर बात करनी चाहिए. इस आधुनिक दौर में हम खुद को कितना ही मार्डन क्यों न कह दें लेकिन कहीं न कहीं महावारी को लेकर हमारे समाज में आज भी रुढ़िवादिता मौजूद है. आज भी सेनेटरी नैपकीन को एक छुपाने वाली चीज समझकर काले रंग की थैली में दिया जाता है. या फिर इसे अपवित्र समझकर दुत्कार दिया जाता है. ऐसे में बेहद जरूरी होता है हमारे समाज में ‘फुल्लू’ जैसे लोगों का होना. Exclusive Interview : ‘उस वक्त दुकानदार से सेनेटरी नैपकीन मांगने के लिए जुबान लड़खड़ा रही थी’ Also Read - गुलाबो सिताबो फिल्म का केआरके ने उड़ाया जमकर मजाक, शूजीत सरकार ने दिया मजेदार जवाब

कहानी- फुल्लू (शारिब अली हाशमी) यूपी के गांव में अपनी मां और बहन के साथ रहता है. उसे औरतों के साथ हंसी-ठिठोली करना बहुत पसंद है. वो गांव की महिलाओं की हर तरीके से मदद करता है. गांव से फ्री में महिलाओं का सामान लाकर देता है. लोग उसे निकम्मा और पागल कहते हैं. मां उसके निठल्लेपन से तंग आकर उसकी शादी कर देती है कि शायद जिम्मेदारी के दबाव में ही सही वो काम करना शुरु कर दे. एक दिन सामान के सिलसिले में वो शहर जाता है और दवाई की दुकान वाले सेनेटरी नैपकीन मांगता है. बस. फिर जो होता है देखने लायक है. यहीं से शुरु होती है फिल्म की असली कहानी. आगे बात करने से पहले एक नजर देखें फिल्म का ट्रेलर  Also Read - Love Aaj Kal 2 Movie Review: उलझी हुई है सारा-कार्तिक की प्रेम कहानी, इम्तियाज अली ये क्या करने लगे हो?


अभिनय- शारिब अली हाशमी का अभिनय कमाल का है. ‘फुल्लू’ के किरदार को उन्होंने सजीवता से भर दिया है. शारिब ने 2012 में आई फिल्मस्तान में जबरदस्त एक्टिंग की थी. उसके बाद 2015 में आई बदमाशियां में भी उनके काम को सराहा गया था. मां के रुप में नूतन सूर्या ने भी बहुत अच्छा अभिनय किया है. एक हताश मां के रुप में वे बेहद सहज लगी हैं. शारिब की पत्नी के किरदार में ज्योति सेठी ने भी बढ़िया काम किया है. Movie Review: मस्ती के डबल डोज़ के साथ धमाल मचाने आ गई है Despicable Me 3

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म्यूजिक:  फिल्म का संगीत बढ़िया है. गांव को माहौल के देखते हुए स्क्रीन प्ले के साथ पिरोए गए हैं और ‘भुनर-भुनर’ वाला गीत काफी अच्छा है. Movie Review: 50…50 दिल चुराता है ये ‘बैंक चोर’

कमज़ोर कड़ियां- जाहिर है फिल्म एक अलग विषय पर बनी है. एडल्ट का सर्टिफिकेट भी मिला है, ज्यादा लोगों को अपनी ओर नहीं खींच पाएगी. जहां तक डायरेक्शन की बात है मैसेज देने के चक्कर में कहीं न कहीं अभिषेक सक्सेना कहानी और स्क्रीनप्ले को ठीक से मैनेज नहीं कर पाए हैं. शुरुआत में फिल्म काफी अच्छी रहती है. लेकिन सेकेंड हॉफ को और अच्छा बनाया जा सकता था. फिल्म खत्म होने पर आपको खुद लगेगा कि कहीं कुछ कहने के लिए बच गया है. लेकिन अगर हम ओवरऑल बात करें तो  शारिब के अभिनय और स्ट्रांग मैसेज में छोटी मोटी गलतियों को इग्ननोर किया जा सकता है.

सारांश में कहा जा सकता है. मासिक धर्म, महिलाओं के स्वास्थ्य और सामाजिक टैबू को ध्यान में रखकर बनाई गई ‘फुल्लू’  देखने लायक फिल्म है.