हॉरर कॉमेडी मूवी का फायदा ये है कि आपको डर के साथ-साथ कॉमेडी का भी मजा आता है और हंसी भी. लोगों को वही फिल्म पसंद आती है जिसमें कुछ नयापन होता है. हॉरर और कॉमेडी के तड़के से भरपूर ‘नानू की जानू’ वैसी ही मजेदार फिल्म है. इससे पहले भी हॉरर फिल्में बन चुकी हैं, लेकिन इस फिल्म की कहानी कुछ अलग है जो आपको बोर नहीं करती.
कहानी- नानू (अभय देओल) और डब्बू (मनु ऋषि) फ्लैट्स पर जबरदस्ती कब्जा जमाने वाले दिल्ली के गुंडे हैं. एक दिन जब नानू सुबह उठता है तो उसे घर का नजारा कुछ अलग ही लगता है. जैसे ओपनर का गायब हो जाना, सभी चीजों का अपनी जगह से हट जाना. खुद ही घर की सफाई हो जाना. नानू इस बात से परेशान हो जाता है. उसे लगता है जरूर घर में कुछ है. लेकिन उसकी बात पर कोई यकीन नहीं करता. फिर एक दिन नानू को पता चलता है कि उसके घर में भूतनी है. फिर क्या होता है? क्या नानू, भूतनी से डर जाता है? उसे भगाने के लिए किसी जादू-टोने में पड़ जाता है? क्या वो भूतनी खुद ही चली जाती है? इन सभी सवालों के जवाब तो आपको फिल्म देखने के बाद ही मिलेंगे. हालांकि, हम इससे पहले अनुष्का शर्मा की फिल्म फिल्लौरी में भी देख चुके हैं लेकिन नानू की जानू उस लिहाज से अलग तरह की फिल्म है. फिल्म में एक तड़कता भड़कता आइटम सॉन्ग भी है- जो हरियाणा की डांसर सपना चौधरी पर फिल्माया गया है.
अभिनय- अगर एक्टिंग की करें तो अभय देओल वैसे तो बॉलीवुड फिल्मों में कम ही नजर आते हैं, लेकिन जब नजर आते हैं, तो बहुत लंबे समय तक अपनी छाप छोड़ जाते हैं. शायद इसका कारण यह है कि हर किसी फिल्म को सेलेक्ट करने की बजाय वे अपने मन-मुताबिक स्क्रिप्ट को पसंद करते हैं. इसीलिए सरल-सहज व्यक्ति और अभिनय से लोगों को प्रभावित करते हैं. अभिनेत्री पत्रलेखा वैसे तो लीड रोल में हैं, लेकिन फिल्म में उनका रोल बेहद छोटा है, वह फिल्म में ब्रेक के बाद ही आपको दिखायी देंगीं. वहीं बात अगर मनु ऋषि की कि जाए, तो उन्होंने जमकर दर्शकों को गुदगुदाया है और एक्टिंग भी मजेदार की है. बृजेंद्र काला ने भी कुमार के अपने रोल में हमेशा की तरह अच्छी ऐक्टिंग की है.
कुछ और भी- पिछले हफ्ते फिल्म बागी2 के बाद जितनी भी फिल्म रिलीज हुई हैं, यदि उनसे तुलना की जाए तो, दर्शक ‘नानू की जानू’ को ज्यादा मनोरंजनात्मक फिल्म कहेंगे. इसमें कोई दो राय नहीं कि जिस फिल्म में कॉमेडी होगी, दर्शक उसे ही ज्यादा पसंद करेंगें, चाहे देखनें वाले किसी भी उम्र के क्यों न हों. फिल्म की शूटिंग दिल्ली और नोएडा में हुई है. दृश्यों में ज्यादा भव्यता नहीं है, लेकिन जो दृश्य हैं, वह अच्छे लगते हैं. फिल्म में डांसर सपना चैधरी का रंग-बिरंगा डांस जो हरिणावी लोकशैली में फिल्माया गया है, अच्छा लगता है. फिल्म में कुछ खास बाते हैं, या यूं कहें कि यह फिल्म कुछ मैसेज देती है-जैसे रोड सेफ्टी कितनी जरूरी है. धूम्रपान और शराब कितनी हानिकारक है. यही नहीं डिजिटल युग में हम मोबाइल पर कितना डिपेंड हैं कि यदि वह इधर-उधर हो जाए तो हम कितना बेचैन हो जाते हैं, चाहे हम कहीं भी किसी भी स्थिति में क्यों न हों. दूसरा हमें किसी के साथ बुरा और धोखाधड़ी नहीं करनी चाहिए. यह 2014 में आई तमिल फिल्म ‘पिसासु’ का रीमेक है. अगर आप बहुत दिनों से आप खुलकर हँसे नहीं हैं तो, इतंजार मत कीजिए, जाइए, और फिल्म देखकर कर आनंदित हो जाइये.
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