बटवारा किसी देश भूमि या सीमा का नहीं होता, विभाजन तो लोगों की भावनाओं का हो जाता है. राहत काजमी की फिल्म ‘मंटोस्तान’ में यही दर्द देखने को मिलता है. मंटोस्तान फिल्म इंडिया-पाकिस्तान पार्टिशन और मंटो की चार सबसे लोकप्रिय और विवादित कहानियों ठंडा गोश्त, खोल दो, आखिरी सैलूट और असाइनमेंट को लेकर बनाई गई है.

फिल्म में कुछ सीन्स तो रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं. जबरदस्त डायलॉग्स से ट्रेलर में वाकई जान लग रही है. फिल्म में मुख्य अभिनेत्री कुलवंत कौर का किरदार निभा रहीं सोनल सहगल ने दमदार एक्टिंग की है.

फिल्म की कहानी उन भयानक रातों के बारे में हैं जो हमेशा सिसकियों की चादर में लिपटी रहती है. चेहरे हमेशा डरे- सहमे से रहते थे न जाने किस घड़ी मौत से सामना हो जाए.फिल्म की शुरुआत रेडियो पर नेहरु की आवाज से होती है. बाहर लोगों का शोर होता है. सब एक दूसरे को मारने में लगे हैं. सरे राह कत्ले-आम हो रहा है. हिंदू… मुसलमान को मार रहा है. मुसलमान भी हिंदू को जानवर की तरह काट रहा है. चारों तरफ डर का माहौल. बहू- बेटियों की इज्जत सरेआम लूटी जा रही है. देश दो टुकड़ो में बंट रहा है. प्रतियोगिता सी हो रही है एक दूसरे को ज्यादा से ज्यादा जख्म देने की.

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फिल्म में रघुबीर यादव जोकि एक मुस्लिम किरदार में है. अपनी बीवी औऱ बेटी को महफूज जगह पर ले जाने के लिए भाग रहे होते हैं. लेकिन कत्लेआम की उस रात में उनकी बीवी भी सिखों की नफरत की शिकार हो जाती है. इनकी बच्ची भी कहीं खो जाती है. और अंत में वो जिस हालत में मिलती है उसे देखकर किसी भी बाप का सीना फट जाए.

जब देश का विभाजन होता है तो आम आदमी को बहुत नुकसान झेलना पड़ता है. लोग अपनों से बिछड़ जाते हैं, घर, जमीन, दोस्त, रिश्तेदा, यहां तक की एक ही मां बाप के दो बेटे-एक भारत में तो दूसरे को पाकिस्तान में रहना पड़ता है.

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दूसरे कहानी में दिखाया है कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान के दोनों सैनिक अपने-अपने बटालियन में देश की सीमा पर पहरा दे रहे होते हैं. किस्मत से वहां दो दोस्त मिल जाते हैं. लेकिन विडंबना ये होती है कि दोनों लंगोटिया यार होने के बाद दुश्मनों की टोली में होते हैं. बातों बातों में गोली चल जाती है. और फिर जो होता है वो देखने लायक है.

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तीसरी कहानी एक सिख पति-पत्नी, शरीर की भूख और ठंडे गोश्त के बारे में है. सोनल सहगल ने ये किरदार निभाया है. इसमें दिखाया है कि किस तरह एक सिख पति अनजाने में ही अपनी पत्नी को धोखा देता है. जिसका सदमा वो बर्दाश्त नहीं कर पाती और फिर…. आप भी इस कहानी का दर्दनाक अंत देखकर अचंभे में रह जाएंगे.

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चौथी कहानी कश्मीर के दर्द पर आधारित है. हालातों और लोगों के बीच इस तरह की मारकाट को देखते हुए किस तरह वहां के लोग पलायन करने के लिए विवश हो जाते हैं. इस कहानी में मुख्य किरदार निभाने वाले मशहूर अभिनेता विरेंद्र सेक्सेना ने अपने रोल में जान फूंक दी है.

Photo- The Nation

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यह जानना दिलचस्प है कि 1940 के लेखक मंटो न केवल भारत और पाकिस्तान में, बल्कि पश्चिम में भी लोकप्रिय हैं. जब देश का विभाजन हुआ तब मंटों पाकिस्तान चले गए थे. लेकिन, पाकिस्तान जाने के बाद मंटो मानिसक रूप से काफी परेशान रहने लगे. उन्होंने उस दौरान बंटवारे के दर्द की कई जीवंत कहानियां लिखीं. जिनमें खोल दो, ठंडा गोस्त, आखिरी सैल्यूट, असाइंमेंट भी शामिल है.

आपको बता दें फिल्म इंडिया में 5 मई को रिलीज हो रही है. फिल्म को कान फिल्म फेस्टिवल के अलावा कई फिल्म फेस्ट में सम्मानित किया जा चुका है. फिल्म में सोनल सहगल, सोएब निकाश शाह, रघुबीर यादव, विरेंद्र सक्सेना, रैना बसनेत, सखी भात, तारीक खान और राहत काजमी लीड रोल में हैं.