
Pooja Batra
पत्रकारिता में 20 साल से अधिक का अनुभव. 2001 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से M.A किया. फिर भारतीय विद्या भवन के फिल्म एंड टीवी ... और पढ़ें
नसीरुद्दीन शाह अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए भी जाने जाते हैं और अक्सर अपने बयानों से सुर्खियों में रहते हैं. उनकी अदाकारी और बेबाक अंदाज ने उन्हें एक अद्वितीय अभिनेता बना दिया है.
हिंदी सिनेमा में एक ऐसा नाम, जिसने अपनी मंझी हुई अदाकारी से हर किरदार को पर्दे पर शानदार अंदाज में पेश किया. हालांकि, उनका बेबाक अंदाज भी सुर्खियों में बना रहता है. इनका नाम नसीरुद्दीन शाह है. उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जन्मे नसीर 20 जुलाई को अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं.
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय की बारीकियां सीखने वाले नसीर ने सिनेमा के जरिए दर्शकों को हमेशा कुछ न कुछ नया और शानदार दिया. नसीर को अपने शानदार अभिनय के अलावा अपनी बेबाकी के लिए भी सुर्खियां मिली.
उन्होंने 1973 में श्याम बेनेगल की फिल्म ‘निशांत’ से अपने करियर की शुरुआत की, जिसमें उनके साथ शबाना आजमी लीड रोल में थीं. इसके बाद ‘जाने भी दो यारों’, ‘मासूम’, ‘आक्रोश’, ‘इजाजत’, ‘अर्द्ध सत्य’, ‘सरफरोश’, ‘इश्किया’ और ‘ए वेडनेसडे’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने दर्शकों के दिलों पर खास छाप छोड़ी.
चाहे ‘मासूम’ में संवेदनशील पिता का किरदार हो, ‘सरफरोश’ में आतंकवादी शायर का, ‘जाने भी दो यारों’ में फोटोग्राफर का या ‘ए वेडनेसडे’ में आम आदमी का, नसीर ने हर रोल में जान डाल दी. एक्शन, रोमांस, ड्रामा हो या कॉमेडी, उन्होंने हर जॉनर में अपनी छाप छोड़ी.
साल 1982 में अभिनेत्री रत्ना पाठक से शादी करने वाले नसीर तीन बच्चों के पिता है, जिनका नाम उन्होंने हीबा, इमाद और विवान रखा है. उनकी निजी जिंदगी उतनी ही सादगी भरी रही, जितना उनका अभिनय प्रभावशाली.

‘पार’, ‘मंडी’, ‘जुनून’ और ‘परजानिया’ जैसी फिल्मों ने उन्हें समानांतर सिनेमा का बेहतरीन अभिनेता बनाया, तो ‘मोहरा’ और ‘इकबाल’ ने उन्हें मुख्यधारा के दर्शकों का चहेता बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.
अभिनय जगत से इतर नसीर की बेबाकी भी पहचान बन चुकी है. समाज, राजनीति और सिनेमा पर किए गए उनके कमेंट्स अक्सर छाए रहते हैं तो कई बार विवादों का भी रूप ले लेते हैं.
साल 2010 में एक इंटरव्यू में उन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्मोग्राफी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अमिताभ ने कोई महान फिल्म नहीं की. क्लासिक ‘शोले’ को भी उन्होंने सिर्फ मनोरंजक बताया, महान नहीं. इसी तरह साल 2016 में उन्होंने राजेश खन्ना को ‘औसत एक्टर’ करार देते हुए कहा था कि 70 का दशक हिंदी सिनेमा का औसत दौर था और राजेश खन्ना की सफलता के बावजूद उनकी अभिनय क्षमता सीमित थी. हालांकि, राजेश खन्ना की बेटी ट्विंकल खन्ना की आलोचना के बाद उन्होंने इस कमेंट के लिए माफी मांगी थी.
नसीर ने सामाजिक मुद्दों पर भी खुलकर बोला. लव जिहाद पर उन्होंने समाज को बांटने का आरोप लगाया, तो सीएए-एनआरसी विवाद के दौरान अनुपम खेर को ‘जोकर’ तक कह दिया था.
देश के चहेते खिलाड़ी क्रिकेटर विराट कोहली पर भी उन्होंने कमेंट करते हुए उन्हें दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज, लेकिन ‘खराब व्यवहार’ वाला खिलाड़ी बताया था.
इन सब विवादों के बावजूद केवल हमेशा एक चीज जो सिनेमा प्रेमियों को नसीर से बांधे रखती हैं- वह है उनका अभिनय. एक ऐसा अभिनय जिसने कई फिल्मों में नए आयाम को छुआ, दर्शकों की संवेदनाओं तक पहुंचने वाला अभिनय, या एक ऐसा विलेन जिसके किरदार ने लोगों में सिहरन पैदा की. उनका संजीदा अभिनय आज भी फैंस को आकर्षित करता है.
(इनपुट एजेंसी)
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