अपनी आगामी फिल्म ‘गुमनामी’ को लेकर नेताजी सुभाष चंद्र के परपोते चंद्र कुमार बोस की आलोचना का सामना करने के बावजूद फिल्मकार श्रीजीत मुखर्जी का कहना है कि अगर उन्हें जेल भी भेज दिया जाए, तो भी वह यह फिल्म बनाएंगे. एक व्यक्ति जिसने 1970/80 के दशक में उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में एक हिंदू संत के रूप में जिंदगी जी, उसे ‘गुमनामी बाबा’ के रूप में जाना जाने लगा. उनसे मिलने वालों ने दावा किया कि वह कोई और नहीं बल्कि नेताजी बोस थे, जिनकी 1945 में एक विमान दुर्घटना में निधन होने की बात कही जाती है.

बोस के परिवार के सदस्यों ने कहा कि किसी दस्तावेजी या फोटोग्राफिक साक्ष्य के बिना ‘गुमनामी बाबा’ को नेताजी बताना ‘आपराधिक जुर्म’ है. लेकिन, इससे अप्रभावित श्रीजीत ने ट्विटर पर लिखा, “मुझे चुप कराने की धमकी देने के जवाब में (चंद्र कुमार) बोस, मैं बता दूं कि मैं अपने देश में रहूंगा और यह फिल्म बनाऊंगा. अगर आप मुझे अदालत में घसीटते हैं, तो मैं अदालत से प्रोडक्शन डिजाइन के विचार मांगूगा और इस फिल्म को बनाऊंगा. अगर आप मुझे जेल में डालेंगे, तो मैं स्क्रिप्ट के कुछ और ड्राफ्ट लिखूंगा और इस फिल्म को बनाऊंगा.”

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता चंद्र कुमार बोस ने गुरुवार को निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी की आलोचना की थी जिन्होंने कथित तौर पर एक साक्षात्कार में दावा किया कि वह ‘गुमनामी’ नाम की फिल्म बना रहे हैं और फिल्म में सुभाष चंद्र बोस को बिना पैसे के एकांत में रहने वाले संन्यासी के तौर पर दर्शाया जाएगा.

चंद्र कुमार बोस ने, “मैं यह जानना चाहता हूं कि इस विकृति का समर्थन करने वाले लोग कौन हैं और नेताजी की छवि को धूमिल करने और अपमानित करने के लिए मिशन नेताजी को कौन धन मुहैया करा रहे हैं. ये देशद्रोही कौन हैं? हम केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से आईबी से जांच शुरू कराने की अपील करते हैं.”

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि चंद्र कुमार बोस ने उन्हें धमकी दी है कि अगर वह यह दिखाते हैं कि गुमनाबी बाबा नेताजी हो सकते हैं तो वह उन्हें भारत छोड़ने पर मजबूर कर देंगे.

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