एक्ट्रेस स्वरा भास्कर भले ही बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस की लिस्ट में शुमार ना होती हों लेकिन उनकी एक्टिंग यक़ीनन बॉलीवुड की किसी भी टॉप एक्ट्रेस को मात दे सकती हैं। स्वरा ने अब तक जितनी भी फिल्में की हैं उन्होंने उसके ज़रिये अपनी एक अलग छाप छोड़ी हैं। अक्सर सपोर्टिंग रोल में नज़र आने वाली मिस भास्कर फिल्म ‘नील बटे सन्नाटा’ में लीड रोल में नज़र आई हैं। फिल्म को डायरेक्ट किया है अश्विनी तिवारी ने। (स्वरा भास्कर अपनी आने वाली फिल्म ‘अनारकली अरावली’ में प्रतिभा दिखाने को है तैयार)

फिल्म कहानी है चंदा शहाए (स्वरा भास्कर) की जो अनपढ़ काम वाली बाई है जिसका एक ही सपना है और वो है अपनी बेटी अपेक्षा (रिया शुक्ला) को पढ़ाने का। चंदा जहाँ एक तरफ दिन रात एक कर, छोटे मोटे जगहों पर काम कर अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए पैसे जमा करती है वहीँ दूसरी तरफ उसकी बेटी अप्पू पढाई से उतना ही चिढ़ती है। अप्पू का पढाई में बिलकुल भी मन नहीं लगता और गणित को उसकी समझ के पार है। चंदा के लाख कोशिशों के बावजूद अप्पू पढाई नहीं करती। अप्पू का कहना है की आखिर वो पढ़ लिख कर क्या करेगी क्योंकि उसका कोई भविष्य ही नहीं है। जिस तरह इंजिनियर का बेटा इंजिनियर और ड्राईवर का बेटा ड्राईवर बनता है उसी तरह एक काम वाली बाई की बेटी भी काम वाली बाई ही बनेगी। लेकिन चंदा हिम्मत नहीं हारती। वो अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए खुद स्कूल जाने लगती है ताकि वो खुद पढ़े और और अपनी बेटी को भी पढ़ा सके।

‘नील बटे सन्नाटा’ बहुत ही खूबसूरत फिल्म है। ऐसी फिल्में बॉलीवुड में बहुत ही कम बनती है लेकिन अफ़सोस इस तरह की क्वालिटी फिल्में बड़ी स्टारकास्ट ना होने की वजह से वो सक्सेस नहीं पा पाते जो बड़ी बजट फिल्मों को मिलती है। ये फिल्म रियालिटी के बहुत करीब है। कई सीन्स ऐसे हैं जिसे देखकर आप मन ही मन मुस्कुराते हैं। फिल्म के हर एक करैक्टर ने फिल्म में जान डाली है फिर चाहे वो स्वरा भास्कर हो या रिया शुक्ल या फिर रत्ना पठाक या पंकज त्रिपाठी जिन्होंने स्कूल प्रिंसिपल का रोल निभाया है।

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