‘पा’, ‘चीनी कम’ और ‘इंग्लिश विंग्लिश’ जैसी फिल्मों के लिए प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक आर.बाल्की की आखिरी फिल्म ‘पैडमैन’ को दर्शकों के साथ ही आलोचकों से भी सराहना मिली, लेकिन यह सैनिटरी पैड पर लगने वाले वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर कोई असर नहीं छोड़ पाई.

बाल्की का कहना है, “हमारी फिल्म एक व्यक्ति विशेष के जीवन से प्रेरित है जो कम लागत में महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड बनाता है. फिल्म में सैनिटरी पैड की लागत पर बात की गई थी, इसलिए इसे जीएसटी से जोड़कर नहीं देखा जा सकता.”

‘पैडमैन’ ने शर्मिदगी से जुड़ी चीज समझी जाने वाली माहवारी पर न केवल लोगों को खुलकर बात करने को प्रेरित किया, बल्कि महिलाओं को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने में अपनी भूमिका निभाई. फिल्म का उद्देश्य महिलाओं की माहवारी और उससे जुड़ी स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना था. 

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नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान आर. बाल्की से पूछा गया कि फिल्म की रिलीज से पहले से ही यह कहा जा रहा था कि शायद महिलाओं से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर फिल्म बनने के बाद सैनिटरी पैड से जीएसटी हट जाएगा लेकिन इस संबंध में कोई पहल नहीं हुई, उन्होंने कहा, “यह फिल्म एक शख्स के जीवन से प्रेरित थी जो समाज की कुरीतियों से परे महिलाओं के लिए कम लागत में सैनिटरी पैड बनाता है, यहां कम लागत की बात की गई. कर कटौती के मामले में कई चीजों का ध्यान रखना पड़ता है. यहां राष्ट्रीय से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चीजें प्रभावित होती हैं. इसलिए पैडमैन को जीएसटी कटौती से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.” 

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पिछले माह रिलीज हुई अक्षय कुमार की फिल्म ‘पैडमैन’ तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले अरुणाचलम मुरुगनाथम की मुहिम से प्रेरित थी.

गरीब परिवार में जन्मे मुरुगनाथम ने माहवारी पर खुलकर बात करने और स्वच्छता जागरूकता फैलाने की कोशिश की थी, लेकिन पत्नी और मां सहित घर किसी सदस्य ने उनकी बात नहीं सुनी. यहां तक कि उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर चली गईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य को पूरा करने में जुटे रहे. इसके बाद उन्होंने कम लागत में सैनिटरी पैड बनाने में सफलता हासिल की थी. इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली.

बाल्की ने इस दौरान दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान के बारे में भी बात की. सरकार संचालित यह संस्थान देश के प्रतिभाशाली अन्वेषकों (Innovator)  को बढ़ावा देता है और उन अन्वेषकों की मदद करता है जो समाज में जमीनी स्तर पर बदलाव लाना चाहते हैं. एक अन्वेषक के तौर पर राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान मुरुगनाथम को भी सम्मानित कर चुका है.

बाल्की ने कहा, “राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान वास्तव में बहुत सारे शानदार अन्वेषकों को प्रोत्साहित करता है. मुंबई में एक बैठक के दौरान इस संस्थान से जुड़े कई लोगों से हमारी मुलाकात हुई. इस दौरान वहां मौजूद अलग-अलग लोगों ने अपनी कहानियां बताईं और वे सारी कहानियां बहुत शानदार थीं.”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि मैंने जो भी कहानी सुनीं, वे सभी कमाल की और रोमांचक थीं जिसे पर्दे पर बेहद शानदार तरीके से पेश किया जा सकता है.”