फिल्म पैडमैन के बाद अब लोग माहवारी जैसे विषय पर खुलकर चर्चा करने लगे हैं. हालांकि पूरी तरह से हिचकिचाहट जाने में थोड़ा वक्त लगेगा. महिलाओं में होने वाले पीरियड को अभी तक एक पाप या हेय की दृष्टि से देखा जाता है. जबकि एक औरतों के शरीर में होने वाली ये एक नैचुलर प्रक्रिया है. पुराने ज़माने में सुविधाओं व जानकारी के अभाव में महिलाएं सैनेटरी नैपकीन जैसी कोई चीज यूज नहीं करती थीं. अब जब समय के साथ सोच में परिवर्तन आया है कुछ महिलाओं इसे अपनी जरूरत समझते हुए इस्तेमाल करना शुरू तो किया है लेकिन अभी भी ऐसी महिलाओं की संख्या कम ही हैं. वरना देश के कुछ हिस्सों में महिलाएं अभी भी कपड़े, राख और भूसे का इस्तेमाल करके दर्द के ये कुछ दिन गुजारती हैं. एक नज़र देखिए माहवारी पर बनीं फिल्म पैडमैन का एक ट्रेलर

बता दें, इस दौरान होने वाली तकलीफ में राहत पहुंचाने के लिए कई जगह पर कुछ रस्में अपनाई गईं हैं ताकि उनका ध्यान बंट सके और कुछ आराम मिल सके. इन परंपराओं को लोग आज भी फॉलो करते हैं.

Image result for karnatak period rituals

Photo credit- ScoopWhoop

कर्नाटक
औरत का दर्द एक औरत ही समझ सकती है. पहली दफा स्टार्ट हुए पीरियड में महिलाओं को काफी परेशानी और दर्द होता है. कर्नाटक में पहले पीरियड के दौरान घर और आस-पास की महिलाएं इकट्ठी होकर खुशी मनाती हैं. लड़की की आरती करती हैं, लड़की को तिल और गुड़ से बना चिगली उंडे नाम की डिश खाने को दी जाती है. ऐसा माना जाता है कि चिगली उंडे खाने से खून के बहाव में कोई रूकावट नहीं आती. घर आए मेहमानों को फूल,नारियल और पान के पत्ते भी दिए जाते हैं.

Image result for asam period rituals

Photo credit- WordPress.com

 

असम
असम में ‘पहले पीरियड’ के दौरान निभाई जाने वाली परंपरा को ‘तुलोनी बिया’ कहा जाता है. इस दौरान अक्सर जैसा की होता आया है लड़की को परिवार से अलग एक कमरे में रहना होता है. वहां पुरुषों को जाने की मनाही होती है. पुरुष चार दिन तक न तो उस कमरे में जा सकते हैं न ही उस लड़की का चेहरा देख सकते हैं. दो जोड़ा छाली (betel nut)को लाल कपड़े में बांधकर पड़ोसी के यहां रख दिया जाता है. उसके बाद सात शादीशुदा महिलाएं उस लड़की को नहलाती हैं. और पड़ोसी के घर में रखी छाली की पूजा करती हैं. इस दिन लड़की को दुल्हन की तरह सजाया जाता है. उसे गहने पहनाए जाते हैं. लड़की के चारों तरफ खुशनुमा माहौल बनाने की कोशिश की जाती है ताकि उसके दर्द में कुछ राहत मिल सके. फिल्म पैडमैन में भी इस जश्न पर एक गाना फिल्माया गया है. 

केरल
केरल में पहले पीरियड को लेकर हुई परंपरा भी असम की परंपरा से मिलती जुलती है. शुरुआती तीन दिन तक लड़की को सबसे अलग एक कमरे में रहना होता है. उस ऐसे कमरे में रखा जाता है जहां लैंप जल रहा हो. उस दीये के पास पीतल के एक बर्तन में नारियल के फूल रखे जाते हैं. माना जाता है कि उस फूल में जितनी कलियां खिलेंगी लड़की को उतने बच्चे होंगे.

Image result for period ceremony in tamilnadu

फाइल फोटो

तमिलनाडु

यहां पर पहले पीरियड को खुशी की तरह मनाया जाता है. बरसों से निभाई जाने वाली ‘मंजल निरट्टू विज्हा’ (Manjal Neerattu Vizha) नाम की परंपरा का लोग आज भी पालन कर रहे हैं. इस दौरान लड़की को सिल्क की साड़ी पहनाई जाती है और यह रस्म विवाह की तरह मनाई जाती है.

बता दें, अक्षय की फिल्म पैडमैन 9 फरवरी को रिलीज हो रही है. पैडमैन में राधिका, अक्षय की पत्नी का किरदार निभा रही हैं. यह फिल्म अरुणाचलम मुरुगनाथम की जिंदगी पर आधारित है कि कैसे मशीन बनाकर उन्होंने महिलाओं को सैनिटरी नैपकिन मुहैया कराया. इस फिल्म में महिलाओं को पीरियड्स में होने वाली परेशानी को भी दिखाया गया है.