डायरेक्टर: आर बाल्की
स्टार कास्ट: अक्षय कुमार, राधिका आप्टे, सोनम कपूर, अमिताभ बच्चन
अवधि: 2 घंटा 19 मिनट
सर्टिफिकेट: U/A

लोगों की भीड़ में लीक से हटकर चलना शायद अपने आप में ही संघर्ष, विरोध और निंदा को न्योता देना है. या फिर गुनाह है शायद, अपनों की फिक्र करना और इस फिक्र को जिद्द बना देना. दिक्कत तो होगी ही. मन भी दुखेगा. प्यार भरी रस्में. कसमें. सब आड़े आएंगी. रिश्ते दुहाई देंगे. लोग हंसी उड़ाएंगे लेकिन कहते हैं ना , एक इंसान खुद को तभी सबसे ऊपर उठा सकता है जब उसमें कुछ करने का जुनून और पागलपन होता है. तभी जाकर वो मैडमैन एक दिन बनता है ‘पैडमैन’.

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कहानी

फिल्म की कहानी मध्य प्रदेश के महेश्वर बेस्ड है जहां का रहने वाला साधारण सा इंसान लक्ष्मीकांत चौहान (अक्षय कुमार) सबकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है. इसी वजह से लोग उसे पागल कहते हैं. फिर उसकी शादी गायत्री (राधिका आप्टे) से होती है, शादी के बाद उसे महिलाओं में होने वाली माहवारी के बारे में पता चलता है. वो अपनी पत्नी को होने वाली परेशानियों को काफी करीब से देखता है. एक दिन वो अपनी पत्नी को एक मैला कुचैला सा कपड़ा छिपाकर ले जाते हुए देखता है. वो कपड़ा इतना गंदा होता है कि उससे वो कभी अपनी साइकिल साफ करने का भी न सोच सके. बस, उसी दिन वो तय कर लेता है कि वो औरतों की माहवारी के लिए कुछ ऐसा करेगा जिससे उनकी तकलीफ को कम किया जा सके. लक्ष्मीकांत अपनी बहन, पत्नी और मां के लिए पेड बनाने की कोशिश करता है. लेकिन उसकी इस हरकत को लोग पागलपन कहते हैं. लोगों को ये एक जघन्य अपराध लगता है. गांव के सभी लोग इसका मिलकर विरोध करते हैं. लक्ष्मीकांत की पत्नी गायत्री भी उसे छोड़ के चली जाती है, फिर अपने जज्बे को पूरा करने के लिए लक्ष्मीकांत गांव से शहर जाता है जहां उसकी मुलाकात परी (सोनम कपूर) से होती है. उसके बाद कहानी में एक ट्विस्ट आता है. जिसे जानने के लिए आपका सिनेमाघर जाना जरूरी है. क्योंकी फिल्म वाकई शानदार है.

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क्यों देखें फिल्म?
आर बाल्कि एक मंजे हुए निर्देशक हैं. कुछ हटकर फिल्में बनाना उनकी सोच का एक हिस्सा है. चीनी कम, पा, शमिताभ, की एंड का जैसी फिल्मों से आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं. अरुणाचलम मुरुगनंथम की जिंदगी पर बनी फिल्म पैडमैन में उन्होंने मनोरंजन के साथ एक मुद्दे को उठाया है. वक्त के बदलते दौर में पीरियड पर बात करने से लोग आज भी कतराते हैं लेकिन इस फिल्म के बाद कुछ औऱ हो न हो लेकिन इस विषय पर चर्चा तो जरूर होगी. निर्देशन की बात करें तो आर बाल्कि का निर्देशन और पीसी श्रीराम की बेहतरीन सिनेमेटोग्राफी देखने को मिलती है. अभिनय की बात करें तो सोनम कपूर एक शिक्षिका के रोल में जमी हैं. राधिका आप्टे एक्टिंग स्वभाविक लगी है. अक्षय कुमार ने बहुत ही उम्दा अभिनय किया है. फिल्म का संगीत अच्छा है. हर फ्लेवर के साथ संगीत ने लोगों को बांधकर रखा है. फिल्म में अमिताभ बच्चन का कैमियो भी सरप्राइज करते हैं. यूएन में दी गई लक्ष्मीकांत यानी अक्षय कुमार की इमोशनल स्पीच सिनेमाघर से बाहर निकलने के बाद भी लंबे समय तक आपके दिल और दिमाग पर असर डालती है.

Source: Youtube

बॉक्स ऑफिस

फिल्म का बजट 25 करोड़ के लगभग बताया जा रहा है. अक्षय कुमार और टीम ने फिल्म का जमकर प्रमोशन किया है. वैसे भी बॉलीवुड खिलाड़ी की फिल्म को देखना लोग पसंद करते हैं. उनकी फिल्मों में फ्लेवर और कलेवर दोनों ही चीजें देखने को मिलती हैं. जिस तरह से फिल्म की मार्केटिंग की गई है. और लोगों को भी इसका एक हिस्सा बनाया गया है. इस लिहाज से वीकेंड पर इसकी अच्छी कमाई करने की उम्मीद है. फिल्म ऐसे मुद्दे पर बनी है जिसे देखकर लगता है इसे कई प्रदेशों में टैक्स फ्री भी किया जा सकता है. इससे आप खुद बॉक्स ऑफिस पर होने वाली कमाई का अंदाजा लगा सकते हैं.