मुंबई, 21 जनवरी | फिल्म निर्माता पहलाज निहलानी ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) का अध्यक्ष चुने जाने के बाद कहा है कि वह फिल्म जगत और सेंसर बोर्ड के रिश्ते को मजबूत बनाने की कोशिश करेंगे, ताकि फिल्में समाज को सामाजिक बुराइयों से परिचित कराती रहें। उन्होंने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारा समाज अवांछनीय तत्वों से मुक्त हो।

निहलानी ने एक साक्षात्कार में अपनी नई भूमिका, सीबीएफसी के साथ अपने अनुभव, संस्था को लेकर अपना दृष्टिकोण और लीला सैमसन के हालिया इस्तीफे पर विचार साझा किए। यह पूछे जाने पर कि लीला सैमसन की जगह लेने के सवाल पर आपका क्या कहना है, उन्होंने जवाब दिया, “मेरे लिए यह बहुत ही आकस्मिक था। मुझे पता नहीं था कि इस पद के लिए मेरे नाम पर विचार हो रहा है। मुझे पहले मीडिया से खबर का पता चला। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से तब तक मेरा कोई संपर्क नहीं हुआ था, उन्होंने मंगलवार सुबह मुझे फोन किया।”

सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि यह काम उतना मुश्किल है, जितना बताया जाता है। बहुत-सी बातों को लेकर मेरे अलग विचार हैं।”

यह पूछे जाने पर कि फिल्मों पर सेंसर बोर्ड का कहां तक दखल होना चाहिए, उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि फिल्म उद्योग और सेंसर बोर्ड की जिम्मेदारियां एक समान हैं। दोनों ही सामाजिक बुराइयों को आईना दिखाने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी हैं कि समाज अवांछनीय तत्वों से मुक्त हो। दोनों जब समान्य मूल्यों पर काम करेंगे, तो आपस में भिड़ने की नौबत क्यों आएगी?”

निहलानी ने आखिर में कहा, “मैं सेंसर बोर्ड के काम की आलोचना या निंदा नहीं करना चाहता। मैं नए सिरे से काम शुरू करना चाहता हूं और यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि सिनेमा जगत और सीबीएफसी के बीच एक सकारात्मक और सहयोगात्मक रिश्ता बने।”