मुंबई: बड़े पर्दे के साथ-साथ डिजिटल की दुनिया में भी अपनी सफलता का परचम लहराने वाले अभिनेता पंकज त्रिपाठी का कहना है कि जब बात वेब सेंसरशिप पर बहस करने की आती है, तो संवाद काफी मायने रखती है. ‘सेक्रेड गेम्स’ में ‘गुरुजी’ और ‘मिर्जापुर’ में ‘कालीन भइया’ के किरदार से दर्शकों का दिल जीत चुके पंकज ने कहा, “हर चीज पर बहस होनी चाहिए क्योंकि संवाद का होना बेहद जरूरी है. डिजिटल में सेंसर के बिना कहानीकारों को अपनी कहानी अपने तरीके से बताने का मौका मिलता है. उनके पास काम करने की आजादी है.” Also Read - Manoj Bajpayee Birthday: जब पंकज त्रिपाठी ने रखी थी मनोज बाजपेयी की चप्‍पल, कहा 'एकलव्य की तरह मैं इनके खड़ाऊं...'

हालांकि उनका यह भी मानना है कि रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर सभी चीजों को छूट नहीं दी जा सकती है. अभिनेता कहते हैं, “कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो सनसनी फैलाना चाहते हैं. उनके पास भी आजादी है क्योंकि यहां कोई सेंसर नहीं है. इसलिए सेंसरशिप होने के पक्ष व विपक्ष में कई सारी बातें हैं और सिर्फ बहस कर ही लोग इसके निष्कर्ष तक पहुंच सकते हैं.” Also Read - Mirzapur के कालीन भैया को लगता है लड़के को समझनी है ये जरूरी बात क्योंकि...

अभिनय की बात करें, तो आने वाले समय में पंकज कबीर खान की फिल्म ’83’ में नजर आएंगे. वहीं पंकज लॉकडाउन के वक़्त अपने अंदर छिपे लेखक को बाहर लाने का प्रयास कर रहे हैं. वह कहते हैं, “कलाकार अक्सर लेखन से जुड़े होते हैं, यहां तक कि अपनी परियोजनाओं में भी, जिसमें उन्हें सिर्फ अभिनय करना होता है. एक कलाकार के तौर पर, लेखक जो कहना चाह रहा है उस बात को हम अपनी बॉडी लैंग्वेज, अपनी कुशलता से पर्दे पर पेश कर दर्शकों से संवाद स्थापित करते हैं.”