निर्देशक: अभिषेक शर्मा Also Read - विक्की कौशल से लेकर कृति सेनन तक, इन बी टाउन सेलेब्स को ग्लैमरस अंदाज में किया गया स्पॉट 

कलाकार: जॉन अब्राहम, डायना पेंटी, बोमन ईरानी और अन्य Also Read - अक्षय कुमार की Housefull 5 में John Abraham और Deepika Padukone की हुई एंट्री? हुआ बड़ा खुलासा

परमाणु – द स्टोरी ऑफ पोखरण Also Read - रिव्यू-अपने भीतर के ‘कसाई’ से रूबरू करवाती कहानी

लंबे चले झगड़े और कानूनी कार्रवाई के बाद आखिरकार जॉन अब्राहम और डायना पेंटी की फिल्म ‘परमाणु- द स्टोरी ऑफ पोखरण’शुक्रवार को रिलीज हो गई.  परमाणु की कहानी में एक सदाबहार जॉनर का मिश्रण आपको एक कहानी के अंदर देखने को मिलेगा. इसकी कहानी में एक वो सारा मसाला मौजूद है जो कि एक फिल्म में होना चाहिए. 1998 की उस घटना को बखूबी बयां करती ये फिल्म दर्शकों को सीटपर बंधकर बैठने के लिए मजबूर कर देती है. डायरेक्टर अभिषेक शर्मा की ये अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्म है. जॉन से ‘मद्रास कैफे’ और ‘विक्की डोनर’ जैसी फिल्म की अपेक्षा रखने वालों के लिए ये फिल्म एक बढ़िया ब्रेन बूस्टर साबित होगी और देशभक्त लोगों को सही मायने में देशभक्ति का पाठ पढ़ाएगी.

कहानी

ये कहानी एक ऐसे आईएएस अधिकारी अश्वत रैना (जॉन अब्राहम) की है, जो देश को दुश्मन के आगे झुकना नहीं बल्कि सिर उठा के चलने का सपना दिखाता है और फिर उस सपने को पाने के लिए हिम्मत दिखाता है. फिल्म 1998 में राजस्थान के पोखरण में हुई दोपहर 3.45 की उस सच्ची घटना पर आधारित है जिसने देश को न सिर्फ सिर उठा कर जीने का मौका दिया बल्कि पूरी दुनिया को दिखा दिया कि भारत अपने वादों और इरादों का कितना पक्का है. आखिर कैसे दुनिया की आंखों के सामने, नाक के ठीक नीचे, तमाम नजरबंदियों के बीच सेना, देश के वैज्ञानिकों और भारत सरकार के उन हीरोज ने एक ऐसा ऑपरेशन ‘ऑपरेशन शक्ति’ अंजाम दे दिया और देश को न्यूक्लियर पावर बना दिया. अश्वत रैना के पिता रिटायर्ड सैन्य अधिकारी हैं जिन्हें भारत-चीन युद्द के दौरान अपने साहस के लिए भारत सरकार से सम्मानित है. अश्वत देश के लिए कुछ कर गुजरना चाहता है और परिवार को भी इस दौरान उसकी नजरअंदाजी का सामना करना पड़ता है. जिस वक्त अमेरिका सैंकड़ों परमाणु टेस्ट कर एक सुपरपावर बन गया और जिसके नक्शेकदम पर चलते हुए चीन ने भी तकरीबन 45 न्यूक्लियर टेस्ट कर लिए, उस वक्त जब सोवियत संघ टूट गया था और भारत एकदम अकेला पड़ गया था, ऐसे में चीन और अमेरिका, पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के सामने लगातार चुनौती बनकर उभर रहे थे. इस वक्त एक अधिकारी ने देश को परमाणु परीक्षण करने का रास्ता दिखाया.

अभिनय

जॉन अब्राहम टफ रोल में ही बेहतर दिखते हैं और ये बात उनकी इस फिल्म से और पुख्ता हो जाती है. हालांकि फिल्म के एक सीन में बेहद टफ बॉडी वाले अधिकारी का एक जासूस से पिटना थोड़ा अटपटा लगता है. लेकिन कुल मिलाकर उन्होंने अच्छा काम किया है. डायना पेंटी एक रॉ एजेंट के रोल में है और अपने रोल के हिसाब से उन्होंने अपना काम बखूबी निभाया है.

क्यों देखें फिल्म:

फिल्म सत्य घटनाओं पर आधारित है. 1998 में भारत में परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिका के साथ-साथ आस-पास के देश भी हिल गए थे. इस पूरी घटना को निर्देशक अभिषेक शर्मा ने बखूब दर्शाया है और फिल्म देखते वक्त आपको गर्व महसूस होता है.फिल्म का स्क्रीनप्ले जबरदस्त है, जिसके लिए इसके लेखक सेवन क्वाद्रस, संयुक्ता चावला शेख और अभिषेक शर्मा बधाई के पात्र हैं.फिल्म का डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफी और लोकेशन बढ़िया है. इसी के साथ समय समय पर प्रयोग में लाई जाने वाली 90 के दशक की फुटेज भी काफी कारगर है.

 

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