Plabita Borthakur talks about Gender discrimination in his upcoming film chhote nawab- अभिनेत्री प्लाबिता बोरठाकुर का मानना है कि लिंगभेद का होना आज भी हमारे समाज में बेहद आम है और उनकी आने वाली फिल्म में लोगों को इसी बारे में जागरूक किया जाएगा कि किस तरह से अपनी भाषा से भी महिलाओं को अलग-थलग रखा जा सकता है, उन्हें कमतर समझा जा सकता है. फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ में अपने किरदार से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री प्लाबिता, कुमुद चौधरी की फिल्म ‘छोटे नवाब’ में फौजिया नामक एक बागी लड़की की भूमिका निभा रही हैं. भारत में फिल्म के रिलीज होने की उम्मीद जल्दी है.Also Read - Vidyut Jammwal ने शेयर किया चौंकाने वाला VIDEO, छह लोगों ने सिर्फ 2 उंगलियों से उठा दिया आदमी को-VIRAL

प्लाबिता कहती हैं, “फौजिया के किरदार को निभाना मेरे लिए काफी फलदायी रहा है क्योंकि वह कई ऐसी युवा महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती है, जो खुद की पहचान बनाने की कोशिश में जुटी रहती हैं. फौजिया एक जिंदादिल, बागी लड़की है, जो अपने दिल की सुनती है, खतरों से खेलती है. जिंदगी में उसकी प्राथमिकताएं बेहद स्पष्ट है. उसे पता है कि उसे अपनी जिंदगी में क्या चाहिए. उसने अपने परिवार में महिलाओं को दबाए जाते देखा है, उन्हें खुशियों को नकारते हुए देखा है और इन्हीं सब के चलते वह घर न बसाने का फैसला लेती है और उसकी यही बात मुझे छू जाती है.” Also Read - Kareena Kapoor के लाल Taimur Ali Khan की केयरटेकर को मिलती है इतनी मोटी सैलरी, रकम जानकर दिमाग घूम जाएगा

Also Read - Beating Retreat: 'ए मेरे वतन के लोगों' इस डब्बी पर लिखा गया था सबसे पहले, लता मंगेशकर का गाना सुनकर रो दिए थे नेहरू

प्लाबिता आगे कहती हैं, “परिवार में हो रही एक शादी के इर्द-गिर्द फिल्म की कहानी बुनी गई है, लेकिन यह महिलाओं की उन चुनौतियों के बारे में भी है, जिनका सामना वे अपनी जिंदगी में करती हैं, जैसे कि अपने ही परिवार में गलतफहमियों और पितृसत्तात्मक मनोभावों से जूझना इत्यादि. लिंगभेद का चारों ओर खूब बोलबाला है और फिल्म में दिखाया गया है कि भाषाओं से भी किस तरह से महिलाओं से भेदभाव किया जाता है, उन्हें अलग-थलग रखा जाता है.”

‘छोटे नवाब’ में अक्षय ओबेरॉय, सादिया सिद्दीकी और राजश्री देशपांडे जैसे कलाकार भी हैं. पिछले साल सिनसिनाटी में आयोजित इंडियन फिल्म फेस्टिवल में फिल्म को प्रसारित किया गया था.