Pregnant Neena Gupta Advised to married with Gay- विख्यात अभिनेत्री और निर्देशक नीना गुप्ता ने सोमवार को कहा कि उनकी आत्मकथा “सच कहूं तो” में उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर उतार चढ़ाव के बारे में ईमानदारी से लिखा है. ‘रैंडम हॉउस इंडिया’ द्वारा प्रकाशित यह आत्मकथा गुप्ता के जीवन के कई पड़ावों को टटोलती है जिसमें परंपरा से हटकर मां बनना, अकेले अपनी संतान की परवरिश करना और बॉलीवुड में सफलतापूर्वक वापसी करना शामिल है.Also Read - शादी के 3 साल तक 'संबंध' बनाने से बचता रहा पति, सच जानकर पत्नी के उड़े होश, उसे तो लड़कों में...

नीना गुप्ता ने अपनी किताब में लिखा- बिन ब्याह मां बनना आसान नहीं है. इस दौरान उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. लोग कई तरह की हिदायतें देने लगते थे. उनके एक दोस्त ने तो ये तक कह दिया था. मुंबई के बांद्रा में एक बैंकर है जो गे है. वहां सोसाइटी में इस वजह से उसे रहने में दिक्कत होती है. इसलिए नीना उससे शादी कर ले. दोनों अपनी-अपनी पर्सनल लाइफ जीएंगे. नीना भी इसी बहाने सैटल हो जाएंगी और वो बैंकर गे कोई भी सामाजिक मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा. Also Read - Chahatt Khanna का दर्द, बुखार में शारीरिक संबंध बनाने के लिए पति करता था परेशान, मां बनकर नहीं मिल रहा काम

नीना गुप्ता –
नीना ने कहा कि मैं अपने परेशानियों से बचने के लिए ऐसा कोई रास्ता नहीं चुन सकती. इस मुश्किल वक्त का मैं सामना करूंगी. 

Neena Gupta Recalls She Was Called 'Behenji', 'Shameless' in Same Breath, Her Traditional-Modern Ideology 'Confused' People

Neena Gupta

गुप्ता ने कहा कि वह 20 साल से अपनी जीवनी लिख रही थीं और हमेशा यह सोचती थीं कि लोग उनके बारे में पढ़ना पसंद करेंगे या नहीं. उन्होंने कहा, “मैं शुरू करती थी और सोचती थी, ‘मेरी जिंदगी के बारे में लिखने को क्या है?’ लोग मेरे बारे में पढ़ना क्यों चाहेंगे? फिर लॉकडाउन हो गया… और मैंने अपने जीवन के बारे में बहुत सोचा और फिर से लिखने का निर्णय लिया.” Also Read - प्यार में बदली 7 साल की दोस्ती, हरियाणा की दो लड़कियों ने मंदिर में कर ली एक दूसरे से शादी

गुप्ता ने कहा, “अब मैं नकारात्मक मानसिकता से बाहर आ गई हूं और लोगों को बताना चाहती हूं. जो चीजें मैंने इतने सालों से छुपा कर रखी थीं. यह राहत की बात है. मुझे लगता है कि किताब पढ़ने के बाद यदि एक व्यक्ति भी इन गलतियों को न करे जो मैंने की, अगर उन्हें लगे कि ‘हां हमें यह नहीं करना चाहिए’, तो यह किताब लिखना सार्थक हो जाएगा.”