महान संगीतकार राहुल देव बर्मन (27 जून 1939 – 4 जनवरी 1994) का आज जन्मदिन है. पंचम दा ने हिंदी सिनेमा जगत में करीब तीन दशक तक राज किया. साल 1960 से 1990 तक आर डी बर्मन ने अपनी धुनों से लोगों को तरंगित किया. आर डी बर्मन को पंचम दा नाम से फिल्म जगत में पुकारा जाता था. पंचम दा नाम के पीछे मजेदार किस्सा है. आर डी बचपन में जब भी गुनगुनाते थे, प शब्द का ही उपयोग करते थे. यह बात अभिनेता अशोक कुमार के ध्यान में आई. सा रे गा मा पा में ‘प’ का स्थान पांचवा है. इसलिए उन्होंने राहुल देव को पंचम नाम से पुकारना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे उनका यही नाम लोकप्रिय हो गया. ठीक इसी तरह पंचमा दा की लव स्टोरी भी काफी दिलचस्प है. आऱडी के रिश्तेदार खागेश देव बर्मन की किताब आरडी बर्मनः द प्रिंस ऑफ म्युजिक उनके जीवन जो कहानी कहती है, वो हकीकत से काफी मेल खाती है. पंचम दा और आशा की शादी दो सुरों का मेल था.

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आरडी बर्मन और आशा भोसले की पहली मुलाकात 1956 में हुई थी. तब तक आशा भोसले ने इंडस्ट्री में अच्छी खासी पहचान बना ली थी. जबकि आरडी बर्मन मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन के टीएनज बेटे थे. करीब 10 साल बाद वो मौका आया जब आरडी बर्मन ने फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ के लिए आशा भोसले से गाने के लिए संपर्क किया. पंचम दा की पहली पत्नी का नाम रीता पटेल था. वे अपनी पत्नी से बेहद परेशान थे और अलग हो गए थे. वहीं दूसरी ओर आशा भोसले भी अपने पति गणपतराव भोसले से भी खुश नहीं थी. एक दिन तो ऐसा आया जब दो बेटों और एक बेटी के साथ गर्भवती आशा ने अपनी बहन के घर की ओर रुख किया. उनका तीसरा बेटा इसी के बाद हुआ.

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इसी बीच आशा की लगातार पंचम दा से गाने के सिलसिले में मुलाकात हो रही थी. दोनों के गाने सुनकर ऐसा लगता था कि ये संगीत के लिए ही नहीं बल्कि जिंदगी में भी एक दूजे के लिए बने हों. इस दौर में दोनों ने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने दिए. फिर पंचम दा को लगने लगा कि वे आशा के साथ सारी जिंदगी गुजार सकते हैं. उन्होंने शादी करने का फैसला किया. यही बात बताने के लिए वे अपनी मां के पास भी गए. लेकिन उनकी ये बात सुनकर वो भड़क गईं और कहा- ये शादी तो उनकी लाश पर ही हो सकती है. आज्ञाकारी पंचम दो को समझ नहीं आया कि वे क्या करें. उनके पास कोई जवाब नहीं था. वे उस वक्त चुपचाप वहां चले गए. उनमें मां का विरोध करने करने की हिम्मत नहीं थी. फिर उन्हें शादी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा.

फाइल फोटो

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हालांकि शादी तो उन्होंने मां के जीते जी ही की लेकिन उस वक्त उनकी मां की ऐसी हालत हो चुकी थी कि वे किसी को भी पहचान नहीं सकती थी. अफसोस की बात तो ये है कि ये साथ भी ज्यादा दिन तक नहीं रह सका. शादी के 14 साल बाद ही पंचम दा, आशा भोंसले को अकेले छोड़कर 54 साल की उम्र में इस दुनिया से चले गए. पंचम के चले जाने के बाद आशा बिल्कुल टूट गई थीं. बाद में वो कई सालों बाद वे खुद को संभाल पाईं.

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बचपन से था संगीत का शौक
कोलकाता में जन्मे राहुल देव बर्मन के पिता सचिन देव बर्मन की गिनती बॉलीवुड के महान संगीतकारों में होती है. पंचम दा ने अपने पिता की परंपरा को आगे बढ़ाया. बचपन से ही आर डी को संगीत का शौक था. जब नौ वर्ष के थे तब उन्होंने पहला गाना कम्पोज कर लिया था इस गाने ‘ऐ मेरी टोपी पलट के आ’ को उनके पिता ने ‘फंटूश’ (1956) में उपयोग किया था.

ऐसे हुई थी पहली शादी
राहुल देव बर्मन की पहली पत्नी का नाम रीता पटेल था. रीता, राहुल की फैन थी. रीता ने अपने दोस्त से शर्त लगाई थी कि वह राहुल के साथ मूवी डेट पर जाएगी और ऐसा उसने कर दिखाया. 1966 में दोनों की शादी हुई और 1971 में तलाक हुआ.

धुन चुराने के लगे थे आरोप
राहुल देव बर्मन पर धुनों को कॉपी करने के आरोप भी लगे, हालांकि कई बार उन्होंने फिल्ममेकर्स के दबाव में आकर ऐसा किया. कई बार उन्होंने प्रेरणा भी ली. मेहबूबा मेहबूबा, मिल गया हमको साथी मिल गया, तुमसे मिलके, जिंदगी मिलके बिताएंगे, दिलबर मेरे जैसे गानों की धुन उन्होंने प्रेरित होकर बनाई.

दिल का दौरा पड़ा
1985 के बाद आरडी का करियर ग्राफ नीचे की ओर आने लगा. उनकी संगीतबद्ध की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं. फिल्मों की असफलता के लिए आरडी के संगीत को भी दोषी ठहराया जाने लगा इससे उन्हें काफी धक्का लगा. 1988 में आरडी को दिल का दौरा पड़ा था. लंदन स्थित अस्पताल में उनका इलाज चला. उस दौरान आरडी ने कई धुनें बनाईं.

ये थी आखिरी फिल्म
राहुल देव बर्मन द्वारा संगीतबद्ध आखिरी फिल्म थी ‘1942 : ए लव स्टोरी’. इसके गाने बहुत हिट हुए. अफसोस की बात रही कि गानों के हिट होने के पहले ही राहुलदेव बर्मन दुनिया से बिदा हो गए. 4 जनवरी 1994 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा दिया.

 

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