
Shilpi Singh
शिव की नगर बनारस से निकलकर सपनो की दुनिया में आई हूं....शिल्पी सिंह बनारस वो शहर जो अपनी भड़ी,गंगा और कमाल के खाने के लिए जाना जाता है. 2009 में ... और पढ़ें
Raj Kapoor Borrowed Money From His Servant: राज कपूर का जन्म 14 दिसंबर 1924 को रमा और पृथ्वीराज कपूर के घर हुआ था, जो उस समय कॉलेज में पढ़ रहे थे. कहा जाता है कि रणबीर राज (उनका असली नाम) ने बचपन से ही ठान लिया था कि एक दिन उनके बाबा जी को उनके पिता के रूप में जाना जाएगा और कई मायनों में उन्होंने यह सपना पूरा भी किया. राज को उनके पिता के 16 साल बाद दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया. राष्ट्रपति ने स्वयं मंच से उतरकर बीमार अभिनेता-फिल्म निर्माता को यह विशिष्ट सम्मान प्रदान किया. एक बेहद दुखद संयोग से, पृथ्वीराज और राज दोनों का निधन सिनेमा में उनके योगदान के लिए देश के इस सर्वोच्च सम्मान को प्राप्त करने के कुछ सप्ताह बाद ही हो गया.
राज कपूर ने शुरू से ही तय कर लिया था कि सिनेमा ही उनका लक्ष्य है. इसलिए अपने पिता के पृथ्वी थिएटर के नाटकों से उनका जुड़ाव बहुत लंबा नहीं था, हालांकि उन्होंने वहां बाल कलाकार (दीवार) और वयस्क (पठान) दोनों के रूप में नाटक किए और सेट से लेकर वेशभूषा और संगीत तक सब कुछ सीखा. इसके बाद 1947 में ‘नील कमल’ में मुख्य भूमिका में उतारा, जिसमें उनके साथ मधुबाला (मुमताज के रूप में) और बेगम पारा जैसी दो सनसनीखेज अभिनेत्रियां थीं. अपनी पहली मुख्य भूमिका के समय तक, राज की शादी एक दूर के रिश्तेदार कृष्णा से तय हो चुकी थी.
6 फरवरी 1947 को राज कपूर ने मुंबई के मध्य में स्थित ईस्टर्न स्टूडियो में एक छोटे मुहूर्त और पूजा के साथ अपनी पहली प्रोडक्शन और निर्देशन की शुरुआत ‘आग’ के लिए की थी. एक हफ्ते बाद शूटिंग शुरू हुई और फिल्म ठीक एक साल बाद शिमला में रिलीज हुई. इसका बजट मात्र 35 लाख रुपये था और राज ने अपनी पहली कार गिरवी रख दी और यहां तक कि अपने घरेलू नौकर द्वारका से भी पैसे उधार लिए.
6 फरवरी 1947 को राज कपूर ने मुंबई के मध्य में स्थित ईस्टर्न स्टूडियो में एक छोटे मुहूर्त और पूजा के साथ अपनी पहली प्रोडक्शन और निर्देशन की शुरुआत ‘आग’ के लिए की थी. एक हफ्ते बाद शूटिंग शुरू हुई और फिल्म ठीक एक साल बाद शिमला में रिलीज हुई. इसका बजट मात्र 35 लाख रुपये था और राज ने अपनी पहली कार गिरवी रख दी और यहां तक कि अपने घरेलू नौकर द्वारका से भी पैसे उधार लिए. दरअसल जब फिल्म बन रही थी तो सेट पर यूनिट को चाय-नाश्ता मुहैया कराने के लिए भी उन्हें पैसों की कमी महसूस हो रही थी. तब उन्होंने अपने नौकर से पैसे उधार लिए थे. इस अनोखी फिल्म में नरगिस समेत तीन मुख्य अभिनेत्रियां थीं, साथ ही उनके कुछ रिश्तेदार भी अभिनय के क्षेत्र में थे. वितरकों द्वारा फिल्म को हाथ लगाने से इनकार करने के बाद राज कपूर ने खुद इसे रिलीज किया. व्यावसायिक रूप से यह फिल्म कुछ खास सफल नहीं रही.
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