रजनीकांत यानी थलाईवा की मच अवेटेड फिल्म कबाली आज रिलीज़ हो चुकी है। फिल्म में रजनी के साथ राधिका आप्टे रोमांस करती नज़र आ रही हैं। फिल्म में धंसिका, दिनेश रवि, कलैयारासन, जॉन विजय और ताइवान के एक्टर विंस्टन चाओ भी मुख्य भूमिका में है। ये फिल्म एक गैंगस्टर ड्रामा है जिसे पा रंजित ने लिखा और डायरेक्ट किया है। रइसके पहले जनीकांत की कुछ फिल्में ख़ास कमाल नहीं दिखा पाई थी और इसीलिए इस फिल्म को लेकर लोग बहुत उत्साहित हैं। लोग अपने रजनीकांत का जलवा देखने के लिए बेक़रार हैं।
फिल्म सुरु होती है कबाली (रजनीकांत) से जो मलेशिया के जेल में 20 साल गुज़ारने के बाद बाहर आता है। जेल से बाहर आने के बाद उसका मकसद है अपनी पत्नी रूपा देवी (राधिका आप्टे) के बारे में पता लगाने का, जिसे लोग मारा हुआ समझते हैं। कबाली का दूसरा मकसद है गैंगस्टर टोनी ली (विंस्टन चाओ) और उसके गैंग से बदला लेने का जिन्होंने उसके परिवार को ख़त्म कर दिया था। टोनी मलेशिया का एक बहुत बड़ा माफिया है जो ड्रग्स और वैश्यावृत्ति का धंदा करता है। कबाली के जेल जाने के बाद उसका धंदा ठीक चल रहा था लेकिन उसके जेल से लौटते ही वो लोग डर जाते हैं और उसे मारने का प्लान बनाने लगते हैं। कबाली भी एक डॉन है लेकिन वो लोगों की भलाई करता और कोई गलत काम नहीं करता।
कबाली एक पढ़ा लिखा और अच्छ लड़का हुआ करता था लेकिन वो गैंगस्टर क्यूँ बना इसके पीछे एक वजह है। उसके और उसकी पत्नी रूपा की लव स्टोरी और कबाली की पुरानी कहानी को फ़्लैश बैक में दिखाया गया है। फिल्म में ट्विस्ट तब आता है जब एक बार फिर कबाली की ज़िन्दगी में खुशियाँ लौट आती है लेकिन टोनी और उसके गैंग वाले उसे मार देना चाहते हैं। यह भी पढ़ें:रजनीकांत की फिल्म ने चुराया ‘मदारी’ का पोस्टर : इरफान
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फिल्म की कहानी यूँ तो कुछ ख़ास नहीं है। गैंगस्टर और माफिया पर आधारीत इस तरह की कई फिल्में हम पहले भी देख चुके हैं। अगर इस फिल्म में कुछ अलग और धमाकेदार है तो वो है सिर्फ रजनीकांत। उनकी उपस्तिथि किसी भी फिल्म को भव्य और ख़ास बना देती है और वही इस फिल्म में हुआ है। अगर उन्हें फिल्म से निकाल दें तो ये फिल्म बेहद बोरिंग लगेगी। रजनीकांत का स्टाइल उनका टशन सब कुछ खास है और इसीलिए फिल्म भी ख़ास लगने लगती है।
राधिका आप्टे की एक्टिंग तारीफे काबिल हैं। उनके और रजनी के बीच उम्र का बहुत बड़ा फासला है लेकिन दोनों की केमिस्ट्री जिस तरह फिल्म में उभर के आई है वो देखने लायक है। यह भी पढ़ें:रजनीकांत का उत्साह अद्भुत है : सचिन तेंदुलकर
फिल्म का डायरेक्शन ख़ास नहीं है। पा रंजित ने फिल्म को बहुत स्लो बनाया है। ऐसा लगता है जैसे फिल्म को ज़बरदस्ती खींचा गया है। फिल्म की कहानी थोड़ी प्रेडिक्टेबल लगती है यानि आप समझ जायेंगे की आगे क्या होने वाला है।
फिल्म के हिंदी वर्शन का म्यूजिक कुछ ख़ास नहीं है।
कूल मिलाकर ये फिल्म सिर्फ रजनी के फैन्स के लिए बनाई गयी है
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