संजय दत्त की बायोपिक संजू बॉक्स ऑफिस पर 200 करोड़ का आंकड़ा पार करने वाली है. इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये फिल्म लोगों को कितनी पसंद आई है. हालांकि फिल्म रिलीज से पहले से ये सवाल उठ रहा था कि संजय दत्त पर बायोपिक बनाने की आवश्यकता क्या है. क्योंकि अभी तक उन्हीं लोगों की बायोपिक को बनते देखा गया है जिनसे कोई प्रेरणा या सीख मिलती हो. संजय दत्त की बायोपिक के मामले में ये बात नई थी. क्या वाकई उनसे हमारे समाज, नौजवान, विकास में कोई सीख मिली है. सुनील दत्त और नरग‍िस के बेटे संजय दत्त ने क्या वाकई जिंदगी में कोई ऐसा काम किया है जिससे वे दर्शकों की सहानुभूति पाने के हकदार हों. ड्रग्स….सेक्स…से भरपूर संजय की जिंदगी से शर्मिंदगी के अलावा और क्या हासिल हुआ है जो इस फिल्म आधार होने का जरिया बन सकती थी. एक ऐसा नौजवान… पैसे और उम्र के नशे में बहकता गलत रास्ते पर चलता जाता है….भटकता है….रंगनियों को ही जिंदगी मान लेता है. मां-बाप को परेशान करता है. उनका सिर सबके सामने झुकाता है…अपने पास अप्रत्याशित हथियार रखता है…जेल जाता है…दाउद से डॉन के संपर्क में रहता है. क्या ऐसे कलाकार पर फिल्म बनना और फिल्म में सहानुभूति की अपेक्षा रखना कितना जायज है? Also Read - सुनील दत्त के फेंके हुए अधजले सिगरेट पीने लगे थे संजय दत्त, नाराज पिता ने...  

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लेकिन फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी के लिए एक फिल्म को चलाने के लिए जितना मसाला चाहिए होता है उतना शायद मिल गया था. उन्हें जेल में मान्यता दत्त से संजय दत्त के किस्से सुनना इतना अच्छा लगा कि उन्होंने इस कलाकार की जिंदगी पर फिल्म बनाने का फैसला कर लिया और परिणाम आपके सामने हैं. सिर्फ चार दिन में केवल भारत में 145 करोड़ का कारोबार करके दर्शकों ने इस फिल्म को सफलता के नए कीर्तिमानों से नवाज़ दिया. Also Read - Ranbir Kapoor की वजह से दुखी हुईं Alia Bhatt, Birthday से पहले लिया ये बड़ा फैसला....फैंस हो जाएंगे परेशान

लेकिन क्या इस फिल्म को बायोपिक कहना सही रहेगा? कुछ लोगों का तो ये भी कहना है कि ये फिल्म संजय दत्त की छवि सुधारने के लिए पी.आर का काम करेगी. सबसे दिलचस्प बात है कि एक दो बातों के अलावा संजय दत्त की पढ़ाई, शादी, बच्चे इस बारे में फिल्म में कहने-सुनने के लिए कुछ नहीं है. शायद यही वजह है कि संजय दत्त और रिचा शर्मा की बेटी त्रिशाला भी इस फिल्म से नाराज है. फिल्म देखकर लगता है कि इसे किसी की जिंदगी को कम और फिल्म को हिट कराने के मकसद से बनाया गया है. फिल्म को इतने सकारात्मक तरीके से दिखाया गया है जोकि असल जिंदगी में नदारद था. बॉलीवुड के इस चरित्र पर बायोपिक बनने के बाद ऐसा लगा था कि शायद दर्शक उस संजय से रूबरू हो पाएंगे जिन्हें वो जानना चाहते थे लेकिन अफसोस ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला. इस फिल्म ने करोड़ों की कमाई तो कर ली लेकिन वे उस ‘संजू’ से नहीं मिल पाएं जिन्हें वो देखना चाहते थे.

 

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