‘हमरी अटरिया पे आजा ओ संवरिया… देखा-देखी तनिक होई जाए‘ विशाल भारद्वाज की फिल्म डेढ़ इश्किया में आपने इस पॉपुलर ठुमरी को रेखा भारद्वाज की आवाज में सुना होगा. इस ठुमरी की असली गायिका थी दिलकश आवाज की मल्लिका बेग़म अख्तर. आज उनका 103वां जन्मदिन है.  बेगम अख्तर को याद करते हुए गूगल ने आज का डूडल उन्हीं पर समर्पित किया है. इस डूडल में बेग़म अख्तर अपने वाद्य यंत्र के साथ हैं. सामने कुछ लोग सुन रहे हैं. अगल-बगल समा जल रही है. कुछ गुलाब के फूल भी दिखाई दे रहे हैं.Also Read - Happy Birthday Google: आज Google मना रहा है अपना 23वां जन्मदिन, Doodle ने पेश किया खास केक

उत्तर प्रदेश के फ़ैज़ाबाद में 7 अक्टूबर 1914 में जन्मी बेगम अख़्तर का बचपन के दिनों से ही संगीत की ओर रुझान था. वह पार्श्वगायिका बनना चाहती थी. उनके परिवार वाले उनकी इस इच्छा के सख्त ख़िलाफ़ थे लेकिन टैलेंट कहां किसी से छिप के रह सकता है. उन्हें भी रास्ता मिल ही गया. बेगम अख्तर को संगीत से पहले नाटकों में मकबूलियत हासिल हुई. Also Read - Google Doodle इस तरह मना रहा है सुभद्रा कुमारी चौहान की 117वीं जयंती

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नाटकों में मिली शोहरत के बाद बेगम अख़्तर को कलकत्ता की ईस्ट इंडिया कंपनी में अभिनय करने का मौका मिला. बतौर अभिनेत्री बेगम अख़्तर ने ‘एक दिन का बादशाह’ से अपने सिने कैरियर की शुरूआत की लेकिन इस फ़िल्म की असफलता के कारण अभिनेत्री के रुप में वह कुछ ख़ास पहचान नहीं बना पाई. कुछ समय के बाद वह लखनऊ चली गई जहां उनकी मुलाकात महान् निर्माता -निर्देशक महबूब खान से हुई जो बेगम अख़्तर की प्रतिभा से काफ़ी प्रभावित हुये और उन्हें मुंबई आने का न्योता दिया. Also Read - Google Doodle On Independence Day 2021: गूगल डूडल भारत की विविध नृत्य शैलियों को समर्पित

वर्ष 1942 में महबूब खान की फ़िल्म ‘रोटी’ में बेगम अख़्तर ने अभिनय करने के साथ ही गाने भी गाए. 1945 में जब उनकी शौहरत अपनी चरम सीमा पर थी तब उन्हें शायद सच्चा प्यार मिला और उन्हों ने इश्तिआक अहमद अब्बासी, जो पेशे से वकील थे, से निकाह कर लिया और अख़्तरी बाई फ़ैज़ाबादी से बेगम अख़्तर बन गयीं. पचास के दशक में बेगम अख़्तर ने फ़िल्मों मे काम करना कुछ कम कर दिया. वर्ष 1958 में सत्यजीत राय द्वारा निर्मित फ़िल्म ‘जलसा घर’ बेगम अख़्तर के सिने कैरियर की अंतिम फ़िल्म साबित हुई. इस फ़िल्म में उन्होंने एक गायिका की भूमिका निभाकर उसे जीवंत कर दिया था. इस दौरान वह रंगमंच से भी जुड़ी रही और अभिनय करती रही.

अपनी जादुई आवाज से श्रोताओं के दिलों के तार झंकृत करने वाली यह महान गायिका 30 अक्तूबर 1974 को इस दुनिया को अलविदा कह गई. बेगम अख़्तर की तमन्ना आखिरी समय तक गाते रहने की थी जो पूरी भी हुई. भारत की प्रसिद्ध ग़ज़ल और ठुमरी गायिका थीं जिन्हें कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1968 में पद्म श्री और सन 1975 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. बेगम अख़्तर को मल्लिका-ए-ग़ज़ल भी कहा जाता है.

उनके जन्मदिन पर पूरा India.com परिवार उन्हें याद करता है.

जीवनी साभार- http://bharatdiscovery.org