Kantara: Chapter One में दिखेगा 800 साल पुराना मार्शल आर्ट, पहले से ज्यादा रौद्र अवतार में नज़र आएंगे 'शिव'?

ऋषभ शेट्टी ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें वह कलरीपयट्टू की ट्रेनिंग लेते नजर आ रहे हैं. जिसे देखकर लगता है वे एक और जबरदस्त हिट देने की तैयारी में हैं.

Published date india.com Published: August 23, 2024 7:46 AM IST
rishabh shetty starrer Kantara Chapter actor will showcase kalaripayattu 800 year old martial art
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‘कंतारा’ के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड जीतने वाले एक्टर-डायरेक्टर ऋषभ शेट्टी इस बात से बेहद खुश हैं कि उनकी मेहनत को इस तरह सम्मान मिला. अब एक्टर इस फिल्म के प्रीक्वल ‘कंतारा: चैप्टर वन’ की तैयारी में जुट गए हैं. इस फिल्म की शूटिंग काफी दिनों से चल रही है. ऋषभ शेट्टी इसका निर्देशन कर रहे हैं. लेकिन इस बार वह और भी ज्यादा रौद्र अवतार में नजर आएंगे और खतरनाक मार्शल आर्ट करते नजर आएंगे. रिपोर्ट्स की माने तो कंतारा: चैप्टर 1 में ऋषभ शेट्टी भगवान परशुराम के रोल में नजर आएंगे. इस रोल के लिए वह काफी कड़ी ट्रेनिंग कर रहे हैं. ऋषभ शेट्टी ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें वह कलरीपयट्टू की ट्रेनिंग लेते नजर आ रहे हैं. वह देश के इस सबसे प्राचीन मार्शल आर्ट को पूरी लगन से सीख रहे हैं, ताकि वह ‘कंतारा: चैप्टर वन’ के साथ न्याय कर सकें. तस्वीर में वह अपने हाथों में तलवार और ढाल पकड़े हुए हैं. उन्होंने बनियान और मैरून रंग की लुंगी भी पहनी हुई है और उनके बाल लंबे हैं जिन्हें उन्होंने बांध रखा है.

फैंस हुए दीवाने, बोले बेसब्री से कर रहे हैं इंतजार
ऋषभ शेट्टी के अंदाज के भी फैंस मुरीद हो गए हैं, और कह रहे हैं कि ‘कंतारा’ की तरह प्रीक्वल भी ब्लॉकबस्टर होगी. फैंस ने एक्टर को ‘कंतारा: चैप्टर वन’ के लिए शुभकामनाएं भी दी हैं. वे कह रहे हैं कि उन्हें इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार है. ‘कंतारा’ में ऋषभ शेट्टी ने कंबाला रेस सीक्वेंस में भैंसा दौड़ दिखाई थी, और अब ‘कंटारा: चैप्टर वन’ में कलरीपयट्टू का सीक्वेंस होगा.

कलरीपयट्टू क्या है और यह कला कितनी पुरानी है?
कलरीपयट्टू मूल रूप से केरल की मार्शल आर्ट है. इसे देश की सबसे पुरानी मार्शल आर्ट माना जाता है. अंग्रेजी में इसे ‘मदर ऑफ ऑल मार्शल आर्ट्स’ कहा जाता है. कलरीपयट्टू के विशेषज्ञों में से एक एक्सेटर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फिलिप जरिल्ली ने बताया था कि यह करीब 12वीं सदी की कला है. यानी इस तरह से देखा जाए तो यह कला 800 साल पुरानी है और इसे ‘कंटारा: चैप्टर वन’ में शामिल किया गया है.

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