
Shilpi Singh
शिव की नगर बनारस से निकलकर सपनो की दुनिया में आई हूं....शिल्पी सिंह बनारस वो शहर जो अपनी भड़ी,गंगा और कमाल के खाने के लिए जाना जाता है. 2009 में ... और पढ़ें
Ronit Roy Struggle Story: ऐसे कई अभिनेता हैं जिन्होंने एक यादगार सहायक भूमिकाओं के बल पर अपना करियर बनाया है, जो किसी भी प्रोजेक्ट पर अपनी छाप छोड़ी है. रोनित रॉय ऐसे ही एक अभिनेता हैं, जिनके करियर में फिल्मों और टेलीविजन दोनों में कई सारी कमाल की भूमिकाओं से लोगों को अपना फैन बना लिया है और आज के दौर में वो बड़े स्टार के तौर पर अपना नाम बना चुके हैं. लेकिन 90 के दशक में अपनी पहचान बनाने की कोशिश में उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा. हाल ही में एक इंटरव्यू में, उड़ान अभिनेता ने उस दौर के बारे में बात की और इस दौरान वो बेहद भावुक भी नजर आए.
हिंदी रश पॉडकास्ट पर बात करते हुए, रॉय ने याद किया कि 1992 में दीपक बलराज विज की फिल्म “जान तेरे नाम” से डेब्यू करने से पहले उनकी ज़िंदगी कैसी थी और उन्होंने स्वीकार किया कि वह एक बंद-से इंसान थे, और इसी वजह से उन्हें कई बातचीतों से दूर रखा जाता था. इसके बारे में बात करते हुए रोनित ने कहा कि ‘सच कहूं तो, मुझे नहीं पता कि शुरुआती दिनों में मेरा करियर क्यों नहीं चल पाया.’ मैं पहले इसके बारे में बहुत सोचता था, लेकिन अब नहीं सोचता
रोनित ने आगे कहा कि ‘मैं अपने दायरे में ही रहता हूं और मुझे लगता है कि इसकी एक वजह यह भी थी कि मैंने लोगों के पास काम के लिए जाना बंद कर दिया और इसलिए, उन्होंने मुझे मौके देना बंद कर दिया’. रॉय ने बताया कि उनकी पहली फिल्म से पहले उनकी स्थिति और भी खराब थी, क्योंकि उनके पास दिन में एक बार के खाने के लिए भी पैसे नहीं होते थे और कभी-कभी तो उन्हें वह भी छोड़ना पड़ता था.
जब उनसे उनके संघर्षों के बारे में पूछा गया और क्या यह सब इसके लायक था, तो उन्होंने एक कहानी सुनाकर जवाब दिया जिससे उन्हें उस स्थिति के लिए आभारी महसूस हुआ जिस पर वह अब हैं उन्होंने कहा, ‘बांद्रा स्टेशन के पास, एक बहुत प्रसिद्ध ढाबा है और हर दिन मैं वहां खाना खाता था. मैंने केवल एक बार ही खाना खाया, क्योंकि मैं इतना ही खर्च कर सकता था और मैं काली दाल की 2 रोटी और पालक पनीर की 2 रोटी के बीच बारी-बारी से खाता था. एक दिन, मैंने उनसे कुछ रोटी और प्याज मांगे क्योंकि मेरे पास पैसे नहीं थे.
हालांकि ढ़ावे वाले ने मुझे 2 रोटियां और थोड़ी दाल दी. मैंने उनसे कहा कि मैंने दाल नहीं मांगी थी और उन्होंने कहा, ‘कोई बात नहीं मेरी तरफ से, आज आपका दाल का दिन है (यह मेरे खर्च पर है, क्योंकि आप इस दिन हमेशा दाल खाते हैं) अभिनेता ने घटना को याद करते हुए आंसू पोंछे उन्होंने कहा कि वह अभी भी उस आदमी का चेहरा देख सकते हैं.
रोनित ने आगे बताया कि डेब्यू करने के बाद भी, उन्हें अपना पैसा बहुत सोच-समझकर खर्च करना पड़ा, क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति अभी भी अच्छी नहीं थी. रॉय ने आगे कहा, ‘मैंने अपनी पहली फिल्म के लिए 50,000 डॉलर कमाए थे और वे मुझे हर महीने 4,000 डॉलर की किश्तों में देते थे. उस समय, यह मेरे लिए बहुत बड़ी रकम थी लेकिन डेब्यू के बाद भी, मैंने जितनी भी फिल्में कीं, उनसे मेरा खर्चा मुश्किल से ही चल पाता था. पैसा कभी नहीं आया सब कुछ अभी भी गुज़ारा करने लायक ही था.
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