
Shilpi Singh
शिव की नगर बनारस से निकलकर सपनो की दुनिया में आई हूं....शिल्पी सिंह बनारस वो शहर जो अपनी भड़ी,गंगा और कमाल के खाने के लिए जाना जाता है. 2009 में ... और पढ़ें
Sanjay Dutt On Reading Books In Jail: अभिनेता संजय दत्त ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे उथल-पुथल भरे दौर के बारे में बता की है और वो था उनका जले जाना और बेहद गंभीर आरोप के संग. दरअसल मुंबई में हुए धमाकों में उनका नाम आया था औऱ उन्हें TADA अधिनियम के तहज सजा हुई थी. बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त ने बताया कि कैसे उन्होंने जेल में अपना समय काटा और इस दौरान उन्होंने कैसे किताबों के जरिए खुद के अंदर कई सारे बदलाव लाए.
हिमांशु मेहता शो में, अनुभवी अभिनेता ने उन वर्षों की उथल-पुथल को याद करते हुए कहा था कि ‘मेरे पिता को धमकियाँ मिल रही थीं, मेरी बहनों को धमकियाँ मिल रही थीं और मेरे पास बंदूक है, लेकिन वे इसे साबित नहीं कर सके. इसलिए मुझे नहीं पता कि आखिर किस वजह से मुझे वहां जेल में डाला गया. मैं बस इतना कह सकता हूँ कि उन्हें यह समझने में 25 साल नहीं लगने चाहिए थे कि मैं TADA अधिनियम या बम विस्फोट मामले में शामिल नहीं था. मुझे नहीं पता कि उन्हें यह समझने में 25 साल क्यों लगे, और फिर बिना बंदूक पाए, बिना कोई बंदूक मिले, मुझे आर्म्स एक्ट के अधिनियम के मामले में दोषी ठहरा दिया गया था.
हालांकि संजय को जब जेल हुई तो उन्होंने कहा कि क्रोध या निराशा को खुद पर हावी होने देने के बजाय, उन्होंने खुद पर काम करना शुरू कर दिया. संजू ने काह कि ‘मैं इसे अपने जीवन का एक हिस्सा मानता हूं और इसे एक सीख के रूप में लेता हूं. मैंने बहुत कुछ सीखा। मैंने देश के कानून सीखे और मैंने बचाव पक्ष का वकील बनना सीखा. मैंने कानून पर बहुत सारी किताबें पढ़ीं.’
इसके साथ ही संजय ने बताया कि ‘मैंने जेल का समय गरिमा के साथ बिताया. जब मैं वहां था, मैंने बहुत सारी किताबें पढ़ीं. मैंने बहुत प्रार्थना की, जप किया, ध्यान किया. मैंने शिव पुराण, गणेश पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत पढ़ीं. जेल में मुझे अपने धर्म के बारे में, सभी महान देवताओं के बारे में पढ़ने का समय मिला. इसके साथ ही जेल में बिताए समय का उपयोग स्वयं से और अपनी आध्यात्मिकता से पुनः जुड़ने के लिए कैसे किया.’
आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन ये सच है कि संजू बाबा जब जेल में थे तो उन्होंने ना केवल काल की किताबें पढ़ बल्कि इस दौरान उन्होंने की सारी कविताओं (शायरियों) का एक संग्रह भी लिखा है जिसे उन्होंने ‘सलाखें’ का नाम दिया है और वो चाहते हैं कि ये लोगों के सामने आए और इसे पब्लिश करवाना चाहता है. हालांकि हाल की कुछ जानकारियों से पुस्तक की रिलीज की स्थिति स्पष्ट नहीं है, उनके अनुभवों ने यासर उस्मान द्वारा लिखित जीवनी ‘संजय दत्त: द क्रेजी अनटोल्ड स्टोरी ऑफ बॉलीवुड्स बैड बॉय’ को भी प्रेरित किया.
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