रेड लाइट एरिया कमाठीपुरा एक चॉल में गुजरा है बचपन संजय लीला भंसाली का बचपन, बताई दिल तोड़ने वाली कहानी

Sanjay Leela Bhansali Childhood In Red Light Area: संजय ने अब तक रेड लाइट एरिया या फिर तवायफ पर कई सारी फिल्में बनाई हैं जिसमें से हालिया आई उनकीबहुप्रतीक्षित पीरियड ड्रामा हीरामंडी है.

Published date india.com Updated: May 8, 2024 9:29 AM IST
रेड लाइट एरिया कमाठीपुरा एक चॉल में गुजरा है बचपन संजय लीला भंसाली का बचपन, बताई दिल तोड़ने वाली कहानी

Sanjay Leela Bhansali Childhood In Red Light Area: संजय लीला भंसाली बॉलीवु़ड के सबसे बड़े फिल्ममेकर के तौर पर जानें जाते हैं और उन्होंने अब तक एक से बड़कर एक गजब की फिल्में दी हैं. संजय वो निर्देशक हैं जिन्होंने अपनी कला से और जादूई नजरों से हर किसी का दिल जीत लिया है. भंसाली बॉलीवुड के ऐशए निर्देशक जो बिग बजट फिल्मों के लिए जानें जाते हैं. संजय ने अब तक कई सारी बहुप्रतीक्षित पीरियड ड्रामा फिल्में बनाई है जिसमें से सारे सुपरहिट या फिर ब्लॉकबस्टर रही हैं.  ऐसे में अब हर किसी की जेहन में यही सावल आ रहा है कि आखिर क्यों संजय अपनी अधिकांश फिल्मों में वेश्याओं, वेश्यालयों और रेड-लाइट एरिया का जिक्र होता है और क्यों वो इनपर इतने हावी रहते हैं.  ऐसे में अब उनका एक पुराने इंटरव्यू वायरल हो रहा है जिसमें, संजय लीला भंसाली ने इसके पीछे असली कारण के बारे में बात की थी कि उनकी फिल्मों में वेश्याओं, वेश्यालयों और रेड-लाइट एरिया का जिक्र क्यों होता है और उन्होंने जो कुछ कहा था वो हैरान करने वाला है.

कई फिल्मों में दिखी है तवायफ, रेड लाइट एरिया की झलक

संजय लीला भंसाली ने कुछ सालों पहले फिल्म कंपेनियन को दिए अपने एक इंटरव्यू में इस बात का जिक्र किया था कि क्यों उनकी अधिकांश फिल्मों में तवायफ, रेड लाइट एरिया का जिक्र होता है और क्यों वो हर बार उन्ही की कहानी को इतनी शिद्दत के साथ फैंस को सामने पेश करते हैं. आपको बता दें संजय की हालिया आई हीरामंडी से लेकर गंगूबाई काठियावाड़ी,देवदास में चंद्रमुखी का किरदार और सावंरिया में रानी का किरदार नुलाबजी हर किसी ने उसी तरह के किरदार को पेश किया था.

कमाठीपुरा में स्थित एक चॉल में गुजरा है बचपन

संजय लीला भंसाली ने फिल्म कंपेनियन को दिए अपने इंटरव्यू में इसके बारे में खुलकर बात की की थी और कहा बताय था कि उनका पालन-पोषण मुंबई के कुख्यात रेड लाइट एरिया, कमाठीपुरा में स्थित एक चॉल में हुआ था और उन्होंने दिन-रात उन महिलाओं के जीवन को बहुत करीब से देखा है और इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि ‘आप बहुत नासमझ या फिर संवेदनशील होते हैं जब आप बच्चे के तौर पर इसे देखते हैं’.

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20 रुपये में महिलाओं को बिकते हुए देखा है

इस पर बात करते हुए संजय काफी इमोशनल हो जाते हैं और उनकी आंखे नम हो जाती हैं और वो कहते है कि कैसे ‘वहां पर महिलाएं खुद को 20 रुपये के लिए बेच देती थी. कैसे आप अपने आप को केवल 20 रुपये के लिए बेच सकते हो और यही वो बातें हैं जो मेरे दिलों दिमाग में रच बस गई हैं. मैंने उन्हें चंद्रमुखी के माध्यम से पाया… हम अपने लिए अनमोल हैं. हमें टैग नहीं किया जा सकता। हमें 5 रुपये या 20 रुपये या 50 रुपये में नहीं बेचा जा सकता. यह अमानवीय है’.

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