चाहे फिल्म ‘मर्डर’ हो या ‘आशिक बनाया आपने’, करियर के शुरुआती दिनों में इमरान कई फिल्मों में लिप लॉक सीन करते नजर आए. आगे चलकर वह ‘सीरियल किसर’ के नाम से मशहूर हो गए. इमरान का मानना है कि अपनी इसी छवि या परिचय के चलते उन्हें कई बार करियर में कई रुकावटों का सामना करना पड़ा है.

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इमरान ने बताया कि उनकी यह छवि किस तरह उनके जीवन में आशीर्वाद और अभिशाप, दोनों साबित हुआ है.

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इमरान ने कहा, “अपनी इस छवि के कारण मैंने अपने करियर में कई हिट फिल्में पाई. मैं झूठ नहीं बोलूंगा..मैं मानता हूं कि इससे मुझे काफी स्वीकार्यता मिली. ऐसी कई फिल्में थीं, जिसमें ऐसे दृश्य आवश्यक थे और मैंने उन्हें किया.”

उन्होंने आगे कहा, “लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब यही छवि मेरे लिए बाधक बनने लगी. मैं कुछ नया करना चाहता था, लेकिन हर बार उन्हें वही एक चीज करने को कहा जाता था. इस कारण मुझे अलग तरह की फिल्में नहीं मिलीं, और मैं एक कलाकार के रूप में खुद को बेहतर तरीके से पेश नहीं कर पाया.”

हालांकि 39 वर्षीय इमरान अब कुछ अलग तरह की फिल्में कर रहे हैं. उनकी फिल्म ‘वाय चीट इंडिया’ की पृष्ठभूमि बिल्कुल अलग है. यह फिल्म शिक्षा के क्षेत्र में घोटालों पर आधारित है.

इमरान कहते हैं कि पिछले कुछ सालों से अलग-अलग किस्म की फिल्में बन रही हैं और वह उनका हिस्सा बनना चाहते हैं, क्योंकि भारतीय सिनेमा में बने रहने के लिए यह एक बेहतर समय है.

पिछले हफ्ते आई फिल्म ‘वाय चीट इंडिया’ के बारे में इमरान कहते हैं, “शिक्षा क्षेत्र में क्रान्ति लाने के लिए इस फिल्म को बनाया गया है.”

इमरान ने इस फिल्म से बतौर निर्माता भी शुरुआत की है. उन्होंने कहा कि इससे उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला, हालांकि अभी काफी कुछ सीखना बाकी है. इमरान ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि सीरियल किसर इमरान हाशमी अब मर चुका है. अब वे अच्छे विषयों पर काम करना चाहते हैं.

नेटफ्लिक्स पर अपनी आने वाली थ्रिलर ‘द बार्ड ऑफ ब्लड’ से अब इमरान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी कदम रखने जा रहे हैं.

(इनपुट आईएनएस)

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