17 हिट फिल्में देने वाला बॉलीवुड का वो सुपरस्टार, जो डब्बा लेकर बाथरूम की लाइन में होता था खड़ा...आखिरी दिनों में ऐसी थी हालत

Shabana Azmi On Rajesh Khanna Lost Stardom: बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना को अपार सफलता के बाद नाटकीय रूप से अपने करियर में गिरावट का सामना करना पड़ा था.

Published date india.com Updated: December 31, 2025 4:54 PM IST
17 हिट फिल्में देने वाला बॉलीवुड का वो सुपरस्टार, जो डब्बा लेकर बाथरूम की लाइन में होता था खड़ा...आखिरी दिनों में ऐसी थी हालत

Shabana Azmi On Rajesh Khanna Lost Stardom: एक समय था जब राजेश खन्ना सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि एक असाधारण हस्ती थे और उनके प्रशंसक सिनेमाघरों के बाहर कतार में खड़े होते थे, हजारों पत्र लिखते थे और यहां तक ​​कि अपने बच्चों का नाम भी उनके नाम पर रखते थे. 1970 के दशक के शुरुआती दौर में, उनका जादू चल रहा था और उनकी लगभग हर फिल्म हिट हो जाती थी, जिससे वे भारतीय सिनेमा के “पहले सुपरस्टार” बन गए. हालांकि स्टारडम, चाहे कितना भी आकर्षक क्यों न हो, हमेशा के लिए नहीं रहता और खन्ना के लिए, इस मुकाम से उनका पतन भी उतना ही नाटकीय था जितना उनका उदय था.

राजेश की फिल्में संघर्ष करने लगीं

सुपरस्टार युग में बदलाव 1973 में शुरू हुआ जब अमिताभ बच्चन ने ‘ज़ंजीर’ के साथ अपनी पहचान बनाई और उसी साल खन्ना और बच्चन दोनों ने ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘नमक हराम’ में अभिनय किया था. हालांकि खन्ना ने ‘आप की कसम’ और ‘रोटी’ जैसी हिट फिल्में देना जारी रखा, लेकिन लगातार सफलताओं का वो सुनहरा दौर, जिसने कभी उनकी पहचान बनाई थी, खत्म हो गया. 1975 तक, बच्चन की ‘शोले’ और ‘दीवार’ के बॉक्स ऑफिस पर दबदबे के साथ, राजेश खन्ना की फिल्में अपनी छाप छोड़ने के लिए संघर्ष करने लगीं और कभी अजेय माने जाने वाले सुपरस्टार को जनता की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा.

निराशा पूरे परिवेश को अपनी चपेट में ले लेती

1980 का दशक विशेष रूप से कठिन साबित हुआ, खन्ना का निजी जीवन उनके करियर के संघर्षों को दर्शाता था. डिंपल कपाडिया के साथ उनका वैवाहिक जीवन डांवाडोल था और लगातार फ्लॉप फिल्मों के कारण अभिनेता का आत्मविश्वास काफी कम हो गया था. 1985 में इंडिया टुडे से बातचीत में डिंपल ने उनकी स्थिति को “दयनीय” बताया और याद करते हुए कहा, “जब एक सफल व्यक्ति बिखर जाता है, तो उसकी निराशा पूरे परिवेश को अपनी चपेट में ले लेती है’.

राजेश खन्ना यह नहीं कह सकते थे कि ‘मैं एक सुपरस्टार हूं’

1983 में आई फिल्म ‘अवतार’, जिसने उन्हें थोड़े समय के लिए प्रसिद्धि दिलाई. बड़े हो चुके बच्चों की परवरिश कर रहे एक बुजुर्ग व्यक्ति का किरदार निभाते हुए खन्ना ने आलोचकों और दर्शकों दोनों को चौंका दिया. भजन “चलो बुलावा आया है” की शूटिंग के लिए वे पैदल चलकर वैष्णो देवी मंदिर तक गए और क्रू के साथ ज़मीन पर सोने जैसी बुनियादी सुविधाओं का इस्तेमाल किया, जिसे शबाना आज़मी आज भी बखूबी याद करती हैं और उन्होंने कहा, “उस समय राजेश खन्ना यह नहीं कह सकते थे कि ‘मैं एक सुपरस्टार हूं’.” ‘अवतार’ ‘कुली’ या ‘अंधा कानून’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म नहीं थी, लेकिन खन्ना के लिए यह एक याद दिलाने वाली फिल्म थी कि वे अब भी दर्शकों से जुड़ सकते हैं.

सार्वजनिक शौचालय में जाते और लाइन लगाते थे

उनके साथ फिल्म में काम कर चुकीं शबाना आज़मी ने रेडियो नशा से बातचीत के दौरान एक यादगार किस्सा सुनाया और उन्होंने बताया कि शूटिंग लोकेशन पर ठीक से शौचालय नहीं थे, सिर्फ सार्वजनिक शौचालय थे. यहां तक ​​कि राजेश खन्ना, जो अपने निर्माताओं की हर सुविधा के आदी थे, उन्हें भी टिफिन लेकर लाइन में इंतजार करना पड़ा. राजेश खन्ना का 69 वर्ष की आयु में 2012 में निधन हो गया

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