नई दिल्ली: हिंदी फिल्मों और वेब शो में अपनी पसंद की भूमिकाओं के साथ बंधनों को तोड़ते हुए अपनी पहचान बनाने वाली अभिनेत्री श्वेता त्रिपाठी शर्मा आयुष्मान खुराना से खुद की तुलना किए जाने पर काफी खुश हो गई. श्वेता ने कहा, “आयुष्मान से तुलना किया जाना आनंदित करने वाला है. हम ऐसे युग में रहते हैं जब प्रतिस्पर्धा स्वस्थ होती है और हमारे साथी हमें बेहतर होने के लिए प्रेरित करते हैं. आयुष्मान ने कलाकारों की इस पूरी पीढ़ी को फिल्मों में अपने पसंद के विषयों पर काम करने की अपनी क्षमता पर गर्व महसूस कराया है, जिसे किसी अन्य अभिनेता ने पहले नहीं छूआ. मुझे खुशी है कि लोग अब तक मेरे द्वारा किए गए काम की सराहना कर रहे हैं. एक कलाकार होने के नाते समाज के चुनौतीपूर्ण मानदंड महत्वपूर्ण पहलू हैं और मेरा प्राथमिक लक्ष्य दूसरों का मनोरंजन करने के साथ ही संदेश देना भी है.”Also Read - Yeh Kaali Kaali Ankhein Trailer: तीन चीज़ें इंसान को बर्बाद कर देती हैं...पैसा...ताकत और...क्या होगा अब मिर्जापुर की गोलू का?

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श्वेता की नई लघु फिल्म ‘लघुशंका’ एक ऐसी ही फिल्म है, जो पुरानी वर्जनाओं को तोड़ने वाली है. इसमें श्वेता ने श्रुति का किरदार निभाया है, जो एक ऐसी युवती है, जिसकी शादी होने वाली है और वह बेडवेटिंग (बिस्तर पर पेशाब) की समस्या से पीड़ित है.” प्रशंसकों ने श्वेता के प्रदर्शन की सराहना की और इस तरह के मुद्दे पर प्रकाश डालने के लिए उनकी प्रशंसा की है. श्वेता का कहना है कि वह इस तरह के ‘अनूठे कंटेंट’ का हिस्सा बनने की कोशिश करती रहेंगी. Also Read - Mirzapur की गोलू गुप्ता ने लगाया हॉटनेस का तड़का, ब्रा में शेयर कर दी ऐसी तस्वीरें, लोग बोले- ये भी ठीक है

उन्होंने कहा, “हर कलाकार का अपना सफर होता है. मैंने शुरू से ही एक सरल मंत्र का पालन किया है, कि मैं उन कहानियों को करूंगी, जिनसे मैं निखरती हूं और जिन कहानियों को समाज को बताने की आवश्यकता है. जब मैं लोगों का समय लेती हूं, तो मैं उनके निवेश के साथ न्याय करना चाहती हूं.”

उन्होंने आगे कहा, “इस साल जब ‘द गॉन गेम’ की परिकल्पना की जा रही थी और निर्माताओं ने मुझे घर पर सीरीज शूट करने के लिए कहा, तो मैं इस धारणा और विचार से बेहद उत्साहित थी. पांच साल पहले, मैंने ‘चिड़ियाघर’ नामक एक फिल्म की शूटिंग की थी, जिसे पूरी तरह से फोन पर शूट किया गया था. मुझे वास्तव में नवोदित निर्देशकों के साथ काम करने में मजा आता है, क्योंकि उनके पास कहानी कहने का एक नया दृष्टिकोण होता है.”