नई दिल्ली: कोरोनावायरस के इस मुश्किल वक़्त में हर कोई एक दूसरे की मदद करने के भाव से आगे आ रहा है मगर सोनू सूद (Sonu Sood) ने अपने प्रयासों से सबका दिल जीत लिया है. प्रवासी मज़दूर और छात्रों को अपने घर लौटाकर सोनू ने लॉकडाउन में एक नेक काम को अंजाम दिया है. बॉलीवुड से लेकर राजनितिक गलियारों में सोनू सूद के चर्चे हैं. हाल ही में एक्टर ने इसी सिलसिले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भी मुलाकात की है मगर इस समय सोशल मीडिया पर सोनू सूद के इन कामों पर उनकी नियत पर सवालिया निशान उठाए जा रहे हैं. Also Read - सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या पर सोनू सूद का बयान- Nepotism पर मत करो टार्गेट

जी हां, दरअसल सोनू ने शुरुआत से ही ट्विटर पर खुद को एक्टिव रखा था और वहीं से वो लोगों तक पहुंचने में कामयाब हो रहे थे. ट्विटर पर सोनू के जवाब ने भी खूब तारीफें बंटोरी हैं मगर अब उन्हीं प्रवासियों के मदद की गुहार वाली ट्वीटस अचानक से डिलीट हो रही है. इस सिलसिले में कई लोगों ने सोनू के नियत पर शक करते हुए कहा कि कहीं ये सब फेक तो नहीं हैं.

बड़ी ताज्जुब की बात है कि जिन ट्वीट्स में लोगों ने सोनू से मदद की मांग की थी और उन्हें वहां रिप्लाई भी मिला था, वो सब अचानक से डिलीट हो रहा है. इस पूरे मामले को देखकर सोनू ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सफाई के तौर पर एक ट्वीट भी किया है. उन्होंने लिखा, “कृपा कर जरूरतमंद ही रिक्वेस्ट डालें. मैंने देखा है कि बहुत से लोग ट्वीट करके डिलीट कर रहें हैं जो उनका ग़लत लक्ष्य साबित करता है. इससे बहुत से ज़रूरतमंद प्रवासियों तक पहुंचने में हमें मुश्किल होगी. विश्वास की इस डोर में बाधा ना डालें.”

सोनू ने इस ट्वीट के माध्यम से अपने ऊपर लगे उन आरोपों का जवाब दिया है. बता दें कि पिछले कुछ दिनों से लोगों का यह भी कहना है कि कहीं सोनू के पीछे कोई राजनितिक पार्टी तो नहीं हैं. खैर, इस मुश्किल वक़्त में आरोप-प्रत्यारोप को नज़रअंदाज़ कर मजबूर लोगों की मदद करना अहम है.