उर्दू के महान शायर गालिब का नाम सुनते ही उनके शायराना अंदाज की याद आ जाती है लेकिन अगर बात डायरेक्ट नीरज पांडे की किताब ‘ग़ालिब डेंजर’ की बात करें तो यहां अंदाजे बयां कुछ और ही है. नीरज पांडे (Neeraj Pandey) ‘ए वेडनेस डे’, स्पेशल 26, बेबी, एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी बॉलीवुड की अच्छी फिल्में डायरेक्ट कर चुके हैं. हाल ही में नीरज पांडे, अभिनेता मनोज वाजपेयी और गीतकार मनोज ने दिल्ली में इस किताब के हिंदी वर्जन का विमोचन किया. किताब के दिलचस्प शीर्षक को लेकर लोगों के मन में कई सवाल थे. साथ ही इसका पहला बीज कहां से जन्मा के बारे में जब नीरज से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा- गालिब उनकी जिंदगी के कण-कण में बसे हैं. गालिब की शायरी और उनके शायराना अंदाज के वे कायल हैं.

नीरज पांडे, मनोज बाजपेयी

नीरज पांडे, मनोज बाजपेयी

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मेरी यही कोशिश थी कि अपनी फिल्मों की तरह किताब के जरिए भी कुछ नया और रोचक लोगों को देने की कोशिश करूं. नीरज ने बताया एक दिन मुंबई में वे किसी मीटिंग से निकले. मीटिंग बांद्रा में थी, वहां से वापस लौटते हुए आदर्श नगर के ट्रैफिक सिग्ननल पर उन्होंने ये किताब लिखने का ख्याल आया. शीर्षक के बारे में बात करते हुए नीरज पांडे ने कहा, मैं थोड़ा दिलचस्प टाइटल सोच रहा था चूंकि गालिब की शायरी से मुझे बेहद प्रेम रहा है और वो मेरे लेखन से भी मैच कर रहा था इसलिए मैंने इस किताब का नाम ‘डेंजर ग़ालिब’ रखा. ‘ग़ालिब डेंजर’ की किताब की कहानी कामरान खान नाम के एक युवा टैक्सी ड्राइवर पर आधारित है जो मुंबई शहर में कुछ बड़ा करने की कोशिश करता है. लेकिन कामरान की ज़िंदगी तब बदल जाती है जब वो मिर्ज़ा नाम के एक डॉन को मरने से बचा लेता है. नीरज ने इस बात का भी खुलासा किया कि भविष्य में वे इस किताब पर फिल्म भी बना सकते हैं.

 

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