बॉलीवुड की पहली सुपरस्टार श्रीदेवी के असमय निधन से बिहार की महादलित बेटियां भी सदमे हैं. उन्होंने पहली बार रुपहले परदे पर खुद की जैसी एक किरदार देखा, तो मन ही मन उससे रिश्ता जोड़ लिया. यह किरदार निभाने वाली सिने सितारा थीं पद्मश्री श्रीदेवी, जिनके अचानक चल बसने की खबर से महादलित समुदाय की ये अंग्रेजी बोलने वाली बालाएं सदमे में हैं. बात 2012 की है. करीब 15 साल के इंतजार के बाद श्रीदेवी ने फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ से बॉलीवुड में अपनी नई पारी की शुरुआत की थी.

ये बालाएं महादलित विकास मिशन की ओर से प्रायोजित ‘इंग्लिश भाषा कौशल प्रशिक्षण’ कार्यक्रम के तहत अंग्रेजी सीख रही थी. कार्यक्रम का संचालन करने वाले संस्थान ब्रिटिश लिंग्वा ने पटना में महादलित बालाओं को फिल्म दिखाने के लिए सिनेमा हाल बुक करवाया था. मकसद उनको फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ में मुख्य भूमिका अदा कर रहीं श्रीदेवी के किरदार से अंग्रेजी सीखने के प्रति प्रोत्साहित करना था.

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ब्रिटिश लिंग्वा के संस्थापक व निदेशक डॉ. बीरबल झा ने बताया कि फिल्म देखकर लड़कियां काफी खुश थीं और अंग्रेजी सीखने के प्रति उनका रुझान दोगुना हो गया था. अब वे आपस में श्रीदेवी के स्टाइल में अंग्रेजी बोलती थीं.

दरअसल, फिल्म में श्रीदेवी एक गृहिणी है जो अंग्रेजी पढ़े-लिखे अपने पति व बेटी से टूटी-फुटी अंग्रेजी बोलकर खुद को पढ़ी-लिखी दिखाने की चेष्टा करती हैं. उनका यह अंदाज दलित बालाओं को काफी भाया.

डॉ. झा ने बताया कि श्रीदेवी के असमय निधन की बात सुनने के बाद उनको कई पूर्व छात्राओं को फोन आया, जो अपनी प्रेरणास्रोत नायिका के नहीं रहने के गम में डूबी हुई थीं.

गौरतलब है कि श्रीदेवी की खुद भी अंग्रेजी भाषा बहुत अच्छी नहीं थी. इसका कारण यह था कि बचपन से ही (चार साल की उम्र से ही) फिल्मों में काम करने की वजह से स्कूली शिक्षा में नियमित नहीं हो पाई थी.

श्रीदेवी एक शादी समारोह में हिस्सा लेने दुबई गई थीं, जहां होटल के बाथटब में डूबने से शनिवार को उनका निधन हो गया.

ब्रिटिश लिंग्वा ने 26 फरवरी को अपने सभी शाखाओं पर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना सभा का आयोजन किया.

डॉ. झा ने कहा कि वे श्रीदेवी का अभिनय से काफी प्रेरित हैं और वे समाज के निचले तबके तक अंग्रेजी भाषा के लाभ को पहुंचाने का अनवरत प्रयास करते रहेंगे.

(इनपुट आईएनएस)