नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने देहरादून के एक उपन्यासकार को निर्देश दिया है कि 2013 में आई ‘क्रिश3’ में कॉपीराइट उल्लंघन के कथित मामले को निपटाने के संबंध में वह फिल्म निर्देशक राकेश रोशन से एक वाजिब पेशकश करे. उपन्यासकार रूपनारायण सोनकर ने वर्ष 2016 में पुलिस में शिकायत दर्ज करा के रोशन पर कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप लगाया था. सोनकर ने दावा किया था कि फिल्म के कुछ दृश्य उनके उपन्यास ‘सुअरदान’ पर आधारित हैं. सोनकर ने यह भी आरोप लगाया था कि उनकी अनुमति लिए बिना ही फिल्म के निर्देशक राकेश रोशन ने ‘क्रिश3’ के उनके उपन्यास पर आधारित कुछ दृश्य फिल्माए थे. Also Read - 'क्या तुम पीड़िता से शादी करोगे' टिप्पणी को ‘गलत तरीके से प्रचारित’ किया गया, हम ‘महिलाओं का बहुत सम्मान’ करते हैं: सुप्रीम कोर्ट

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की पीठ ने राकेश रोशन से कहा कि वह राशि का भुगतान कर क्यों नहीं देते. इसके साथ ही पीठ ने उनके खिलाफ मामला खत्म कर दिया, जिसमें निर्देशक के खिलाफ आरोप पत्र दायर हो गया था. रोशन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कहा कि निर्देशक को उपन्यासकार की ओर से मामले में समझौते की कोई पेशकश नहीं मिली है. जेठमलानी ने कहा, ‘दूसरे पक्ष की ओर से पेशकश आने दें. अगर वह वाजिब हुई तो हम निश्चित तौर पर विचार करेंगे.’ पीठ में न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और डी. वाई. चंद्रचूड़ भी हैं. इसने मामले को 9 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध कर दिया है और उपन्यासकार को रोशन के वकील को एक प्रस्ताव देने को कहा है. Also Read - क्या है 50 फीसदी आरक्षण सीमा का मामला? सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजा नोटिस

पीठ ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि प्रतिवादी संख्या तीन (सोनकर) अपना दावा पेश करेंगे जो उचित हो ताकि याचिकाकर्ता (रोशन) को इसे स्वीकार करने के लिए कहा जा सके.’ रोशन ने पिछले साल 20 जुलाई को आए उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश को शीर्ष न्यायालय में चुनौती दी है. उच्च न्यायालय ने कॉपीराइट के कथित उल्लंघन के मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी थी. Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को जारी किया नोटिस, पूछा- क्या 50 फीसदी से बढ़ाई जा सकती है आरक्षण की सीमा