Suraiya and Dev Anand Love Story- 2004 में आज ही के दिन बेहद खूबसूरत एक्ट्रेस सुरैया ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था. देवानंद के लिए सुरैया जैसी अभिनेत्री आजीवन कुंवारी रहीं. आखिर वो कौन सी वजह थी जिसकी वजह से दोनों का प्यार परवान नहीं चढ़ पाया. ऐसी थी देव और सुरैया की लव स्टोरी.

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देवानंद. खूबसूरत हीरो. जिनपर लड़कियां जान छिड़कती थी. काला कोट तक पहनना उनके लिए बैन कर दिया गया था ताकि उनकी खूबसूरती पर फिदा होकर कोई लड़की आत्महत्या न कर लें. लेकिन दुख तो तब हुआ जब वे सुरैया को दिल देकर जिंदगी भर का दर्द मोल ले बैठे. देवानंद की आत्मकथा ‘रोमांसिंग विद लाइफ़’ में उनके प्यार का जिक्र है.

फाइल फोटो

देवानंद लिखते हैं, काम करने के दौरान, हम दोस्त से गहरे दोस्त हो गए थे. और फिर गहरे दोस्त से प्रेमी. सबको पता चल गया. वैसे भी प्रेम कहानी छुपती ही कहां है. एक दिन भी ऐसा नहीं होता, जब एक दूसरे से बात किए बिना रह जाएं. कभी आमने-सामने. कभी फोन पर. घंटो बातें होती रहती थी. देवानंद की सुरैया से पहली मुलाकात फ़िल्म ‘विद्या’ के सेट पर हुई थी.

देवानंद ने अपना परिचय देते हुए कहा था, ”सब लोग मुझे देव कहते हैं. आप मुझे किस नाम से पुकारना पसंद करेंगी?”
सुरैया ने हँसते हुए जवाब दिया था – ”देव.”

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देव साहब ने कहा, ‘मुझे सुरैया से प्यार हो गया था. लेकिन एक अड़चन थी. वो थी उनकी नानी. उनकी नानी के बिना घर में पत्ता तक नहीं हिलता था. जैसा की हर प्रेम कहानी में होता आया है. कोई न कोई विलेन आ ही जाता है. मैं जब भी सुरैया के घर में जाता. उन्हें खुशी न होती. मेरी पहले की तरह स्वागत नहीं होता. लेकिन जैसे-जैसे लोगों का हमारे मिलने को लेकर एतराज बढ़ता जा रहा था वैसे ही हमारे बीच प्यार की तड़प भी बढ़ती जा रही थी.

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‘मुझे सुरैया को देखे बिना चैन नहीं पड़ता. एक- एक पल काटना मुश्किल हो गया था. सुरैया के परिवार ने हमारे प्यार पर बंदिशें लगा दी थीं. मिलने-जुलने पर रोक लगी थी. देव साहब ने सिमी ग्रेवाल को दिए एक इंटरव्यू में भी कहा, सुरैया बड़ी एक्ट्रेस थी. हमेशा लोगों से घिरी रहती थी. उससे मिलने के लिए बहुत जद्दोजहद करनी पड़ती थी.

एक दिन हम चुपके से एक पानी टंकी के पास मिले और सुरैया ने मुझसे लिपटकर कहा- आई लव यू. इसके बाद मेरे पांव ज़मीन पर नहीं पड़ रहे थे. मैंने सोच लिया था. जब ऐसे नहीं चलेगा. मैंने फौरन सगाई के लिए एक अंगूठी खरीदी. मैं सुरैया के प्यार के लिए तड़प रहा था. लेकिन उसे पता नहीं क्या हुआ. उसने मेरी अंगूठी समंदर में फेंक दी. हालांकि ये बात मैंने कभी सुरैया से नहीं पूछी उसने ऐसा क्यों किया. दो प्रेमी अलग हो गए, मजहब की दीवार तले एक बार फिर प्यार दफन हो गया. दोनों ने फिर एक साथ कोई फिल्म नहीं की. न कभी मिले. सुरैया ने ताउम्र किसी से शादी नहीं की. देव ने अपनी प्रेम कहानी का जिक्र बेहद खूबसूरती से इस किताब में किया है. देवआनंद ने लिखा, पहले प्यार का अहसास ही अलग होता है.

देव साहब ने एक इंटरव्यू में कहा, आप खुद बताइए, एक लड़का एक लड़की के एक पास जाता है जिससे वो बेइंतहा प्यार करता है. उससे शादी करना चाहता है. लेकिन वो लड़की जब बेबस होकर आपसे कहती है. मेरा परिवार…मेरे रिश्तेदार… मेरी नानी…मेरा धर्म…ये लोग…वो लोग..तो आप क्या करेंगे. देव ये बात कहते हुए चुप हो गए….खामोश..जो अपने आप में एक जवाब था. खामोशी भरा जवाब, जिसे बिना बोले वो भी समझ रही थी और मैं भी. बस. उस दिन मैं फूट-फूट कर रोया था. अंदर से टूट गया था. लेकिन उस दुख के बाद मैंने अपने आप को संभाल लिया था. फिर मैं उससे कभी नहीं मिला. पता चला उसने कभी शादी नहीं की. एक आध पार्टी में मैंने उसे देखा. बस.

फोटो- यू ट्यूब

फिर एक दिन किसी ने मुझे फोन करके बताया सुरैया अब इस दुनिया में नहीं रही. मुझे बहुत दुख हुआ ये सुनकर. कई बार ऐसा होता है आप अपना दुख जता भी नहीं सकते. मैं सुरैया को अंतिम समय में देखने भी नहीं गया. जाता तो भी क्या होता. लोगों को बात करने का एक और मौका मिल जाता. एक हेडलाइन मिल जाती. लोग मेरी तस्वीरें खींचते. वो सबके लिए एक मजे की बात हो जाती. सब मुझसे सवाल करते. मैं क्या कहता. सुरैया एक सुंदर अभिनेत्री थी. अच्छा गाती थी. मैं उससे प्यार करता था. इतना काफी था मेरे लिए. मैं चुपचाप बैठ गया. उदास था. लेकिन वो इन तमाम दुखों से आजाद हो गई हो….किसे पता है…वो तो चली गई इस दुनिया से.

लेकिन किसी के जाने से दुनिया कहां रूकती है. उन्होंने साल 1954 में फिल्म की शूटिंग के लंच ब्रेक के दौरान अपनी सह कलाकार कल्पना कार्तिक से शादी कर ली थी. शादी के बारे में उन्होंने किसी को भी नहीं बताया. देव के अनुसार, शादी बहुत ही निजी फैसला होता है मैं इसे लोगों के सामने ढिंढोरा नहीं पीटना चाहता था. हमने चुपचाप शादी कर ली. शादी के बाद भी सेट पर काम करते रहे. लोगों को पता तक नहीं चलने दिया. लेकिन कैमरा मैन ने हमारी चोरी पकड़ ली. क्योंकी मोना ने अपनी अंगुली में अंगूठी पहनी हुई थी. लेकिन दोनों की शादी लंबे समय तक नहीं चल सकी. उनके दो बच्चे हुए. सुनील आनंद और देविना आनंद. देविना वही नाम था जो देव की शादी से पहले उन्होंने और सुरैया ने अपनी बेटी के लिए सोचा था. देव जिंदगी के उस पड़ाव पर पहुंच गए थे. जहां वो जाना चाहते थे. उन्होंने कहा-

जिंदगी ये ख्याल है जैसे कि मौत ये ख्याल है
न सुख है न दुख है
दीन है न दुनिया
न इंसान न भगवान
सिर्फ मैं….सिर्फ मैं….

31 जनवरी 2004 को 74 साल की उम्र में जब सुरैया का निधन हुआ, हर किसी को उम्मीद थी उन्हें आखिरी विदाई देने के लिए देवानंद जरूर आएंगे लेकिन वो नहीं आए और इस तरह ये लवस्टोरी खत्म हो गई. जब तक सांस चली देव काम करते रहे. और….3 दिसंबर 2011 को लंदन में चुपचाप जिंदगी को अलविदा कहकर दुनिया से चले गए.

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