Sushant Singh Rajput Suicide: युवा और सफल एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद से बॉलीवुड में भूचाल सा आ गया है. सुशांत की आत्महत्या के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. एक कारण बॉलीवुड में नेपोटिज्म यानी परिवारवाद को भी बताया जा रहा है. रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सुशांत सिंह एक शानदार एक्टर होने बावजूद इंडस्ट्री में अलग-थलग पड़ गए थे. इस बीच इस तर्क का समर्थन करते हुए सिंगर कुमार सानू ने कहा है कि इंडस्ट्री की हालत बहुत खराब है. उन्होंने कहा कि आज सुशांत सिंह राजपूत मरा है….कल किसी सिंगर के बारे में आप ऐसा सोच सकते हैं. Also Read - सुशांत राजपूत केस: सलमान खान, करण जौहर के खिलाफ शिकायत खारिज, कोर्ट ने कही ये बात

उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट कर ये बातें कही हैं. वह म्यूजिक कम्पनीज़ को कहना चाहते हैं कि आज सुशांत सिंह राजपूत मरा है कल कोई सिंगर, म्यूजिक कंपोजर, लिरिस्क राइटर भी मर सकता है. फिल्मों से ज्यादा बड़ा माफिया म्यूजिक इंडस्ट्री है, सबको लगता है कि हम बिजनेस को रूल करें. Also Read - सनी देओल की फि‍ल्‍म 'अर्जुन पंडित' से प्रभावित था विकास दुबे, पुलिसकर्मियों के बीच जाना जाता था 'पंडित'

उन्होंने कहा कि आजकल के बच्चे… नए सिंगर परेशान हैं. डायरेक्टर काम करना चाहता है, म्यूजिक कंपोजर काम करना चाहता है लेकिन म्यूजिक कम्पनी बोलेगी कि ये मेरा आर्टिस्ट नहीं है. मैं समझ सकता हूं कि आप लोग बड़े हैं. म्यूजिक को कंट्रोल करते हैं. रेडियो में फिल्मों में क्या बजेगा कंट्रोल करते हैं. लेकिन ऐसा मत कीजिए
. ये दो लोगो के हाथों में जो ताकत है न, वे लोग कहते हैं कि केवल 2 लोग से गाना गवाओ. उसको नहीं.

उन्होंने कहा कि मेरा हो गया, मैं खुश हूं, 15 सालों से मैं काम कर रहा हूं. मैं अपनी दुनिया में खुश हूं. लेकिन आज के नए सिंगर, लिरिस्क रायटर खून के आंसू रोते हैं. अगर वो मर गए तो आप पर प्रश्न चिन्ह आएगा.

उन्होंने आगे कहा कि ये मेरे साथ हो सकता है. वो एक्टर जिस पर उंगलियां उठ रही है कि सोनू से नहीं अरजित सिह से गवाओ, मुझे बुला कर गाना गवा कर फिर डब करना क्यों? मेरे साथ हो सकता है तो छोटे बच्चों के साथ क्या कर रहे होंगे आप लोग. मैं 1991 से मुम्बई में काम कर रहा हूं. 1989 से वैसे काम कर रहा हूं. 10-10 बार गवाते हो फिर डब किसी और से करवाते हो… ऐसा कैसे हो सकता है. आप न मात्र का पैसा देते हो, युवाओं को टॉर्चर मत करो, डायरेक्टर प्रोड्यूसर को भी उनकी पसंद का म्यूजिक बनाने नहीं दिया जा रहा है. वो भी खुश नहीं है, म्यूजिक संकुचित होता जा रहा है.