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अभिनेता शशि कपूर को रविवार को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने मुंबई के पृथ्वी थिएटर में शशि को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया। पुरस्कार के रूप में शशि कपूर को स्वर्ण कमल, 10 लाख रुपए का चेक और शॉल प्रदान किया गया। Also Read - Ravi Dubey will host Dadasaheb Phalke International Film Festival 2020, दादासाहेब फाल्के अवार्ड 2020 की मेजबानी करेंगे रवि दुबे

मुंबई में हुए सम्मान समारोह के दौरान पूरा कपूर परिवार मौजूद था। शशि कपूर को ऋषि कपूर समारोह स्थल तक लेकर आए और काफी देर उनके साथ खड़े रहे। यही नहीं, अमिताभ बच्चन, शबाना आजमी, श्याम बेनेगल, रमेश सिप्पी, हेमा मालिन भी कार्यक्रम में दिखे। कार्यक्रम में सैफ अली खान भी नजर आए। वही शशि कपूर को इस सम्मान मिलने के साथ ही कपूर ख़ानदान इकलौता ऐसा ख़ानदान हो गया है। जिसके परिवार के तीन सदस्यों को सबसे बड़ा फ़िल्म सम्मान मिल चुका है।

-ऐसे में एक नज़र कपूर ख़ानदान के उन तीन कलाकारों पर जिन्हें सिनेमा जगत के सबसे बड़े सम्मान से सम्मानित किया गया।

1- पृथ्वीराज कपूर – पृथ्वीराज कपूर दरअसल कपूर परिवार के पहले सुपरस्टार थे। एक ही समय में वे भारतीय थिएटर और हिंदी फिल्म जगत का सबसे कामयाब चेहरा बन गए थे। उन्होंने पृथ्वी थिएटर की स्थापना की। भारत की पहली सवाक फिल्म आलम आरा में काम किया। पृथ्वीराज कपूर को उनके सिनेमाई योगदान के चलते 1971 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

2- राज कपूर – पृथ्वीराज कपूर के सबसे बड़े बेटे थे राजकपूर। भोली सूरत और सादगीपूर्ण तथा सशक्त अभिनय से अपना खास मुकाम बनाने वाले राजकपूर भारतीय फिल्म जगत के सबसे बड़े शो मैन के तौर पर स्थापित हुए। महज 24 साल की उम्र में पिता के साये से अलग राजकपूर बतौर निर्देशक अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुए। उनकी फिल्म आवारा को भारतीय फिल्म इतिहास की बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है। यह भी पढ़े-शशि कपूर को मिला दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

बता दे कि राजकपूर भारतीय सिनेमा के पहले ग्लोबल स्टार थे। उन्हें 1987 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पुरस्कार लेने से पहले ही उन्हें अस्थमा का अटैक पड़ा और वे व्हील चेयर से उठ नहीं पाए थे। तत्कालीन राष्ट्रपति महोदय ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए राजकपूर के पास जाकर उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया।

3- शशि कपूर – पृथ्वीराज कपूर के सबसे छोटे बेटे हैं शशि कपूर। शशि कपूर ने अपने पिता के थिएटर और फिल्म दोनों की विरासत को बखूबी संभाला। जब जब फूल खिले, वक्त, दीवार, कभी-कभी और जूनुन जैसी फिल्मों में काम करने के अलावा उन्होंने 34 चौरंगी लेन, उत्सव जैसी फिल्मों का निर्माण भी किया था। शशि कपूर ने अपने पिता की विरासत पृथ्वी थिएटर को एक बार से जीवित किया और कई अंग्रेजी फिल्मों के भी हीरो रहे।

हालांकि इसी परिवार के शम्मी कपूर का दावा भी दादा साहेब फाल्के पुरस्कार पर मजबूत दिखता है, जिन्होंने अपने एनर्जी और स्टाइल से ख़ास पहचान बनाई थी।

वैसे कपूर ख़ानदान के अलावा दो और परिवार ऐसा है। जिसके दो-दो लोगों को भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च पुरस्कार मिल चुका है। प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर को 1989 में, जबकि उनकी बहन आशा भोंसले को 2000 में दादा साहेब फाल्के मिला था। वहीं फिल्म निर्माता-निर्देशक बीआर चोपड़ा को 1998 और उनके छोटे भाई यश चोपड़ा को 2001 में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

फिल्म ‘कभी-कभी’, ‘सिलसिला’, ‘नमक हलाल’, ‘उत्सव’, ‘सत्यम् शिवम् सुंदरम्’ में अभिनय कर चुके शशि कपूर की फिल्म ‘दीवार’ के एक दृश्य में उनके डायलॉग, ‘मेरे पास मां है’ को आज भी लोग याद करते हैं। करीब तीन साल से भी ज्‍यादा वक्‍त से शशि कपूर किडनी की बीमारी झेल रहे हैं। उन्‍हें एक समय तो सप्ताह में दो बार डायलिसिस कराना पड़ता था।