नई दिल्ली. इस 15 अगस्त को देश की आजादी के 71 साल पूरे हो जाएंगे. इसी खास मौके पर अक्षय कुमार स्टारर फिल्म GOLD भी पूरे भारत के सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है. फिल्म GOLD की स्टोरी हॉकी में आजाद भारत के पहले गोल्ड मेडल की कहानी है. 15 अगस्त 1948 को जब भारत अपनी स्वतंत्रता का पहला जश्न मनाने वाला था, उससे ठीक 3 दिन पहले, 12 अगस्त 1948 को भारतीय हॉकी टीम ने वर्ल्ड हॉकी के सीने पर तिरंगा लहराकर देश की पहली आजादी का जश्न दोगुना कर दिया था.

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12 अगस्त, 1948 को आजाद भारत का पहला GOLD

दुनिया दंग थी, ओलंपिक एसोशिएशन सन्न था क्योंकि देश के बंटवारे के बावजूद लंदन का वेम्बले स्टेडियम हॉकी में भारत की अजेय ताकत का गवाह बना था. अपनी आजादी से पहले तो भारत हॉकी का सिरमौर था ही आजादी मिलने के बाद भी उसका परचम डगमगाया नहीं था. भारत ने साल 1928, 1932 और 1936 में हुए ओलंपिक गेम्स में ब्रिटिश इंडिया के बैनर तले सोने का तमगा हासिल किया था. लेकिन, स्वतंत्र भारत ने अपना पहला गोल्ड मेडल 1948 में 12 अगस्त के दिन लंदन ओलंपिक गेम्स में जीता.

ग्रेट ब्रिटेन को हराकर जीता GOLD

भारत पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहा था. उसने पहले ऑस्ट्रेलिया को 8-0 से रौंदा, फिर अर्जेन्टीना को 9-1 से हराया और स्पेन को 2-0 से मात देते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई, जहां उसका मुकाबला नीदरलैंड्स से हुआ. भारत ने सेमीफाइनल मुकाबले को 2-1 से जीतते हुए फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन से भिड़ने का लाइसेंस हासिल किया. और, फिर गुलामी की जंजीरों का बदला लेते हुए उन्हें 4-0 से चारो खाने चित्त कर दिया.

पहली GOLD जीत का मजेदार किस्सा

मजेदार बात ये है कि भारत-पाकिस्तान का विभाजन हो चुका था. लेकिन 1948 ओलंपिक्स में दोनों देशों के सामने एक टीम बनाने का सुझाव रखा गया. लेकिन, इस सुझाव पर अमल करने में भारत-पाकिस्तान ने दिलचस्पी नहीं दिखाई. नतीजा, भारत तो GOLD जीता पर पाकिस्तान अपना मैच ड्रॉ खेलने और फिर नीदरलैंड्स से 4-1 से हारने के बाद टूर्नामेंट में चौथे नंबर पर रहा.