नई दिल्लीः अगर हम बॉलीवुड इंडस्ट्री में बेहतरीन खलनायकों का नाम लेंगे तो हर किसी की जुबां पर सबसे पहला नाम अमरीश पुरी का ही आएगा. बॉलीवुड की दुनिया में हर एक एक्टर हीरो बनकर अपनी पहचान बनाता है लेकिन वहीं इसकी दूसरी तरफ पूरी साहब ने विलेन का रोल निभाकर लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई. बॉलीवुड के अपने इस महान कलाकार को आज यानि 12 जनवरी को खो दिया था. अमरीश पुरी की मौत आज से 15 साल पहले 2005 में ब्रेन हैमरेज के चलते हुई थी. उनकी मौत ने पूरे फिल्मी जगत को एक गहरा सदमा दिया था और आज तक उनकी जगह खाली है.

जब हम उनके किरदार को याद करते हैं तो ऐसा लगता है कि अब शायद ही कोई ऐसा कलाका आएगा जो अपनी एक्टिंग से जान फूक देगा. कई दशक तक बॉलीवुड में अपने नाम का सिक्का चलाने वाले अमरीश की टक्कर का कोई विलेन आज भी बॉलीवुड में नहीं ,उनकी 33 साल पहले आई मूवी मिस्टर इंडिया का वो डॉयलाग मोगैंबो((Mogambo)) खुश हुआ हर बच्चा बच्चा जानता है, तो वहीं ‘दिलवाले दुलहनिया ले जाएंगे’ में अमरीश पुरा का डायलॉग ‘जा सिमरन जा’ तो ऐसा आइकॉनिक डायलॉग हैं जिसे आज भी लोग काफी पसंद करते हैं.

फिल्म में करियर बनाने से पहले अमरीश एम्प्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन मिनिस्ट्री ऑफ लेबर ऐंड एंप्लॉयमेंट में काम करते थे क्योंकि जब वह पहली बार स्क्रीनिंग के लिए गए थे तो वह इसमें फेल हो गए थे. अमरीश पुरी (Amrish Puri) का जन्म 22 जून 1932 को पंजाब राज्य के जालंधर में हुआ था.

बेहतरीन आवाज के मालिक अमरीश को साल 1967 में उनकी पहली मराठी फिल्म ‘शंततु! कोर्ट चालू आहे’ में काम मिला. इस फिल्म में उन्होंने एक अंधे व्‍यक्‍त‍ि का किरदार निभाया किया था. वहीं साल 1971 में ‘रेशमा और शेरा’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा.

अमरीश की मुख्य फिल्मों में कुर्बानी, नसीब, हीरो, अंधाकानून, दुनिया, मेरी जंग और सल्तनत जैसी कई फिल्मों में उनके दमदार को आज भी याद किया जाता है. उनके चंद डायलॉग आज भी लोगों के जुबान पर चढ़े हुए हैं.