लंबे समय से स्किन कैंसर से जूझ रहे पद्मश्री एक्टर टॉम ऑल्टर अब इस दुनिया में नहीं रहे. शुक्रवार रात 9.30 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली. सिनेमा में अपने बेहतरीन योगदान के लिए जाने-जानेवाले टॉम ऑल्टर ने कई यादगार भूमिका निभाई. लेकिन टॉम के बारे में बेहद ही कम लोग जानते है कि उन्हें शायरी और चाय का बहुत ही शौक था. टॉम की पहचान आम दर्शकों के बीच एक विदेशी एक्टर के तौर पर होती थी. लेकिन दिल से वो इंडियन ही थे. टॉम का परिवार अमेरिका से आकर इंडिया में बस गया था. मसूरी में जन्मे टॉम हिंदी और उर्दू दोनों ही जुबान पर कमाल की पकड़ रखते थे.

बीबीसी के एक इंटरव्यू में टॉम ने बताया कि हमारा जिस खानदान से रिश्ता है, वहां जहां देखो शायर बैठे हैं. बड़े भाई साहब इंग्लिश में शायरी करते हैं. तो चचेरे भाई शायर होने के साथ मशहूर नॉवेलिस्ट. टॉम की माता जी और बहन को भी लिखने का काफी शौक है. इसलिए शायरी का शौक उन्हें बचपन से ही था. टॉम के पिता, दादा- नाना पादरी थे और इबादत उर्दू में करते थे. इसलिए टॉम की उर्दू जुबान पर अच्छी पकड़ थी. यह भी पढ़े: टॉम अॉल्टर को राजेश खन्ना की फिल्म ‘अाराधना’ से मिली थी एक्टर बनने की प्रेरणा  

शायरी के अलावा टॉम चाय के भी बड़े शौकीन थे. टॉम के मुताबिक चाय के सात प्याले इंसान को ताज़गी से भर देते हैं. चाय के लिए टॉम की दीवानगी को देखते हुए उन्हें एक बार फिल्में छोड़कर मैनेजर बनने का भी ऑफर मिला था. फिल्म मेम साहब की ज्यादातर शूटिंग सिलीगुड़ी के पास मौजूद चाय के बागान में हुई हैं. उस दौरान टॉम के चाय से प्यार को देखते हुए कुछ लोगों ने ऑफर दिया कि फिल्म लाइन छोड़कर चाय बागान में आ जाए.

टॉम आज भले ही हमारे बीच ना हो लेकिन अपने अभिनय और अंदाज के दम पर वो हमेशा ही सिनेप्रमियों के दिल पर राज करते रहेंगे.